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Ambala News: गंदगी से अटीं नालियां, पानी निकासी ही बाधा

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अंबाला छावनी के वार्ड नंबर 9 की नालियों से निकाला गया गोबर व गंदगी। संवाद
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अंबाला। गंदगी से अटीं नालियां, टूटी सड़कें और गंदे पानी की निकासी नहीं होने से वार्ड नाै के निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य नाले के हालात भी खस्ता हैं। हालांकि जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नगर परिषद ने महेशनगर चौक से लेकर केडी अस्पताल के पास मुख्य नाले तक पाइप को जोड़ दिया है।
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इस नाले से पानी की निकासी होगी या नहीं, ये तो बारिश आने के बाद होने वाले जलभराव से ही स्पष्ट हो पाएगा। वार्ड में कुल 6324 मतदाता हैं और इनमें 3217 पुरुष और 3107 महिला मतदाता हैं। वार्ड की दूसरी बड़ी समस्या बेसहारा गोवंश और आवारा कुत्तों को लेकर है जोकि महेशनगर में खटीक मंडी के बाहर बनी रहती है। यहां मीट के लालच में कुत्ते बैठे रहते हैं जोकि कई बार हादसे का कारण भी बन चुके हैं।

खाने पीने के सामान और सब्जियाें आदि के लिए भी बेसहारा गोवंश मुख्य सड़क पर हादसे का कारण बन रहे हैं। इसके अलावा नेशनल हाइवे की सर्विस लेन के साथ बनाया गया नाला गंदगी से अटा पड़ा है और इसकी साफ-सफाई को लेकर न तो नगर परिषद द्वारा ध्यान दिया जा रहा है और न ही हाइवे द्वारा।
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स्ट्रीट लाइटों की कमी



वार्ड नंबर 9 में महेश नगर के अलावा अशोक विहार, खटीक मंडी, गोबिंद नगर, कबीर नगर, ट्यूबवेल कॉलोनी, शिव प्रताप नगर, शास्त्री नगर, छोटा दयालबाग के क्षेत्र शामिल हैं लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। कुछ क्षेत्रों में तो लाइटें न होने के कारण गलियों में अंधेरा पसरा रहता है।

मुख्य सड़क अधूरी

वार्ड की सबसे बड़ी और प्रमुख समस्या दयालबाग चौक से महेशनगर की तरफ आने वाली सड़क है। इस सड़क को टूटे हुए लगभग चार साल बीत चुके हैं। लेकिन न तो सीवरेज पाइप डालने वाले ठेकेदार ने इसे दुरुस्त करने की कोशिश की और न ही नगर परिषद ने। मात्र खानापूर्ति के तहत पैचवर्क करके काम चलाया जा रहा है।



इस संबंध में बलबीर सिंह का कहना है कि वार्ड 9 में एक नहीं बल्कि ढेरों समस्याएं हैं। मुख्य सड़क की हालत काफी खस्ता है और जो दूसरी इंटरलॉकिंग टाइल्स से निर्मित सड़क है, उसका लेवल ही बिगड़ गया है जोकि हादसे का कारण बनती जा रही है।





लोकेश शर्मा बताते हैं कि महेशनगर क्षेत्र हमेशा जलभराव की मार झेलता है। इससे कारोबार ठप हो जाता है। ब्रह्मकुमारी चौक के पास सड़क का हिस्सा काफी नीचा है। इसलिए पानी की निकासी नहीं हो पाती। अब पाइप डाले हैं, देखते हैं यह कितना कारगर साबित होते हैं।



नीरज ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में तो काफी स्ट्रीट लाइटें लगी हैं और कुछ में नाममात्र। इस कारण हादसे का डर सताता रहता है। शिकायत करते हैं तभी स्ट्रीट लाइटें दुरुस्त होती हैं। अन्यथा इनकी तरफ कोई भी ध्यान नहीं देता। दूसरी समस्या बेसहारा गोवंश और आवारा कुत्तों की है।
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वर्जन

सड़क के निर्माण को लेकर कार्यवाही चल रही है। वहीं नई स्ट्रीट लाइटों की निविदा को लेकर भी प्रक्रिया जारी है। आचार संहिता के कारण कुछ समय लग रहा है।



मंदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता, नप सदर।
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