अंबाला सिटी। गांव के सरपंच प्रतिनिधि अभिषेक शर्मा ने बताया कक्कड़ माजरा गांव में रहने वाले फर्जी चिकित्सक डाॅ. बंगाली 15 वर्ष से अधिक समय से गांव में क्लीनिक चला रहा था। वहीं स्वास्थ्य विभाग की इस पर नजर ही नहीं पड़ी। जिसका फायदा उठाकर झोलाछाप ने गांव में ही मकान बना लिया परिवार के साथ स्थायी रूप से बस गया। गांव के लोग चिकित्सक से दर्द, खुजली, खांसी जुकाम सहित बुखार व अन्य सामान्य बीमारियों का उपचार करवाते थे। उन्होंने बताया कि एक दो बार दवा के रिएक्शन को लेकर विवाद हुए हैं मगर कभी किसी मरीज या गांव के निवासी की शिकायत नहीं मिली है।
स्वास्थ्य विभाग को भी धोखे में रखा
झोलाछाप ने अवैध डिग्री के आधार पर मरीजों को कई वर्षों तक जांचा। इतना ही नहीं इस दौरान चिकित्सक ने विभाग को भी धोखे में रखा। जबकि इन दिलों क्लीनिक की नियमित जांच हो रही है। लिंगानुपात को लेकर विभाग की सख्ती के लिए जिला आयुष विभाग को इस प्रकार के चिकित्सकों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
गांव में नहीं कोई चिकित्सक
सरपंच प्रतिनिधि ने अभिषेक ने बताया कि गांव में इसके अलावा अन्य कोई चिकित्सक भी नहीं है। इसके अलावा ग्रामीणों को शहजादपुर सीएचसी ही जाना पड़ता है। इसलिए ग्रामीण छोटी मोटी बीमारियों के लिए उक्त चिकित्सक का ही आसरा लेते थे। मगर उन्हें नहीं पता था कि चिकित्सक के पास वैध डिग्री ही नहीं है।