- बधियाकरण के अभियान पर लाखों रुपये किए जा रहे खर्च फिर भी समस्या का नहीं हो रहा समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कैंट इलाके में कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। ढाई महीनों में 1151 लोगों को काटा है। यह लोग कैंट के ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्र से भी अस्पताल में उपचार कराने पहुंच रहे हैं। हालात यह हैं कि कैंट में कोई गली या कॉलोनी नहीं बची है जहां पर कुत्तों का झुंड नहीं है। डॉगबाइट के बढ़ते मामलों को देखते हुए नगर परिषद ने एजेंसी को बधियाकरण का काम तो दिया है मगर वह अधिक कामयाब होते नहीं दिख रहे हैं।
इस साल जनवरी, फरवरी व मार्च में कैंट नागरिक अस्पताल में 4496 लोग डॉग बाइट के बाद उपचार लेने पहुंचे। इनमें जनवरी में 1512 तो फरवरी में 1684 मरीजों ने एंटी रेबिज वैक्सीन लगवाई है। इसके बाद मार्च में अब तक 1300 से अधिक लोगों को वैक्सीन चार बार लगाई गई है।
कैंट में हैं 10 हजार कुत्ते
नगर परिषद ने अंबाला कैंट में कुत्तों की संख्या 10 हजार होने का अनुमान लगाया है। इसके लिए उन्होंने एजेंसी को एक साल पहले कुत्ते के बधियाकरण की निविदा दी थी। इसमें एजेंसी को तीन हजार कुत्तों का बधियाकरण करना था। एजेंसी का दावा है कि उन्होंने दो हजार कुत्तों का बधियाकरण कर दिया है। बाकी एक हजार को जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके बावजूद कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है।
बढ़ता जा रहा खौफ
जनवरी- 378
फरवरी- 421
मार्च- 325
कुल- 1151
केस-1
जिस पैर में परेशानी उसी में काट लिया
रामकिशन कॉलाेनी निवासी प्रवेश ने बताया कि वह घरों में सफाई का काम करती हैं। मंगलवार सुबह काम कर घर जा रही थी तभी कॉलोनी में कुत्ते ने पीछे से काट दिया। उनके पैर में कुत्ते ने काटा। जिस पैर से वह पहले ही परेशान हैं। वह दिव्यांग हैं और अब उन्हें अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
केस-2
बाजार में पालतू कुत्ते ने काटा
छावनी की नई आबादी निवासी आशीष ने बताया कि कुछ दिन पहले वह बाजार से घर जा रहा था तभी कुत्ते ने उसके पैर पर काट लिया। हालांकि यह कुत्ता पालतू था लेकिन इसके बाद भी सुरक्षा को लेकर उन्होंने नागरिक अस्पताल में जाकर टीकाकरण करवाया।
केस-3
बेटी के चेहरे पर झपटा
छावनी के सेक्टर 34 निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि करीब दो साल पहले उनकी पांच साल की बेटी पास में दुकान पर सामान लेने गई थी। जब वह वापस आ रही थी तो कुत्ते ने उसके चेहरे पर बुरी तरीके से काट लिया था। कुत्ते के काटने के निशान आज भी बेटी के चेहरे पर मौजूद हैं।
हर समय रहता है भय
छावनी की ट्रिब्यून काॅलोनी एसोसिएशन के सदस्य और अधिवक्ता सतीश कुमार गोयल ने बताया कि उनकी काॅलोनी में आठ से दस कुत्ते हैं। कई बार यह कुत्ते गेट पर पड़ी गंदगी को उठाकर काॅलोनी में जगह-जगह गिराते हैं। कुछ कुत्तों को काॅलोनी से बाहर छोड़ा गया था लेकिन कुछ समय बाद फिर से इनकी संख्या में बढ़ोतरी हो गई। हर समय कुत्तों के काटने का भय बना रहता है।
अंबाला छावनी में सड़कों पर घूम रहे लावारिस कुत्ते। संवाद- फोटो : संगठन