वह 50 एकड़ की खेती करते हैं। कई वर्षों से खेतों में पराली अवशेषों को आग नहीं लगाते। पराली की गांठ बनवाते हैं, ताकि भूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहे और प्रदूषण भी न हो।
-किसान कर्म सिंह, हिमांयुपुर गांव।
वह कई वर्षों से कृषि विभाग से जुड़े हैं। 20 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। वह पराली प्रबंधन को लेकर दूसरे किसानों को भी जागरूक कर रहे हैं। अधिकारियों का मार्गदर्शन मिल रहा है।
-किसान खुशप्रीत सिंह, धुराला गांव।
पराली प्रबंधन को लेकर विभाग के अधिकारी किसानों को जागरूक कर रहे हैं। वह भी पराली की गांठ बनवाएंगे और अन्य किसानों को भी मिलकर जागरूक करेंगे, ताकि प्रदूषण न हो।
-किसान बलविंद्र सिंह, तेजा गांव।
वह 15 एकड़ में खेती करते हैं। उनको खेती के बारे में कोई सहायता लेनी होती है तो अधिकारियों से संपर्क करते हैं। वह पराली के अवशेषों में आग नहीं लगाते। कई वर्ष से गांठ बनवा रहे हैं
-किसान दिलप्रीत सिंह, धुराला गांव।