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Ambala News: लोको पायलट व सह लोको पायलट पर लटकी बर्खास्तगी की तलवार

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अंबाला। चंडीगढ़-अंबाला रेल मार्ग पर हुए हादसे को लेकर लोको पायलट (गुड्स) अखिलेश कुमार और सहायक लोको पायलट मनोज कुमार पर बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है। अभी दोनों को एस 5 चार्जशीट दी गई है। यह रेलवे की कर्मचारियों पर सबसे बड़ी कार्रवाई होती है।



अगर उन्हें बर्खास्त किया जाता है तो उन्हें रेलवे से जुड़ी तमाम सुविधाओं से भी वंचित रखा जाएगा। हालांकि इस कार्रवाई से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का भी मौका दिया जाएगा। मामले में ढकोली फाटक पर तैनात गेटमैन से भी पूछताछ की गई है। वहीं रेलवे लाइन पर लगे सिग्नल सिस्टम को भी आंका गया है। जल्द ही इस मामले की रिपोर्ट मंडल रेल प्रबंधक के समक्ष पेश की जाएगी ताकि वह अपना अंतिम निर्णय ले सके। इस मामले को लेकर उत्तर रेलवे के मुख्यालय नई दिल्ली के बड़ौदा हाउस तक भी आंच पहुंची है। वहां की विभागीय टीम भी दो दिन से चंडीगढ़ में डेरा डाले हुए है।
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घटना का दोबारा सीन बनाया

हादसे को लेकर वीरवार को घटना के सीन को रीक्रिएट किया गया (दोबारा बनाया गया)। दिल्ली से आई टीम दूसरे दिन भी ढकोली फाटक के पास डटी रही। इस दौरान खाली इंजन को चलाकर देखा गया कि फाटक खुलने के बाद पहला सिग्नल का रंग कौन सा था और हादसे के वक्त कौन सा। इस दौरान गेट मैन सहित प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए गए ताकि मामले की फाइनल रिपोर्ट तैयार करके मंडल रेल प्रबंधक का सौंपी जा सके।







चालक व सह चालक की पदावनति भी संभव



लाल सिग्नल क्रॉस करने वाले चालक व सह चालक की परेशानी बढ़ने वाली है। दोनों पर बर्खास्त होने की तलवार लटक गई है। वहीं इस प्रक्रिया के बाद उन्हें पदावनति करके शंटर आदि के पद पर तैनात किया जा सकता है। इसके अलावा तीन से पांच साल तक उनकी वेतन वृद्धि भी नहीं होगी और उन्हें पदोन्नति के लिए भी अयोग्य माना जाएगा। लाल सिग्नल पार करने से जुड़े पूर्व के मामलों में ऐसी कार्रवाई इंजन के चालक व सह चालक पर हो चुकी है।







विरोधाभास का नतीजा



प्राथमिक जानकारी में सामने आया है कि चंडीगढ़ से जब अंबाला की तरफ मालगाड़ी का खाली इंजन आ रहा था तो ढकोली फाटक की अप व डाउन लाइन पर दो ट्रेनों का आवागमन हुआ था। इसमें एक ट्रेन खाली इंजन के आगे चल रही थी। जब वह ट्रेन ढकोली फाटक क्राॅस कर गई तो गेटमैन ने पीछे आ रहे इंजन की जानकारी हासिल नहीं की और फाटक खोल दिया।







नहीं लगाए इमरजेंसी ब्रेक



इस दौरान इंजन लगभग 70 से 80 किमी की गति पर दौड़ रहा था। जब तक चालक ने लाल सिग्नल देखा, तब तक काफी देर हो चुकी थी। अगर चालक इंजन के इमरजेंसी ब्रेक लगाता तो हादसा काफी भयावह हो सकता था और इसमें कई लोगों की जान भी जा सकती थी। हालांकि इस हादसे में एक कार का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था।
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अभी मामले की जांच चल रही है। दिल्ली की विशेष टीम ने भी आंकड़े जुटाए हैं। रिपोर्ट के आधार पर ही इस संबंध में आगे फैसला लिया जाएगा। हालांकि यह एक बहुत बड़ी लापरवाही है।



- विनोद भाटिया, डीआरएम अंबाला।
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