अंबाला। रेलवे ने ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उत्तर रेलवे के अंबाला मंडल के अंतर्गत धूरी स्टेशन पर गुरुवार को लगभग 250 करोड़ की अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया गया। इस नए बदलाव के साथ ही स्टेशन पर दशकों पुरानी मैकेनिकल इंटरलॉकिंग (लीवर फ्रेम वाली व्यवस्था) को पूरी तरह से हटा दिया गया। मौजूदा समय में इस रेल खंड पर 22 ट्रेनों का संचालन हो रहा है। इसमें 18 मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के अलावा चार पैसेंजर ट्रेनें संचालित हो रही हैं, वहीं नई सुविधा से अब वंदे भारत सहित शताब्दी ट्रेनों के संचालन की भी रुपरेखा तैयार हो सकेगी।
परिचालन क्षमता में होगा बड़ा सुधार
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नए सिस्टम के लागू होने से ट्रेनों के संचालन में मानवीय चूक की संभावना न के बराबर हो जाएगी। वेस्टरेस मेक की इस नई इंटरलॉकिंग प्रणाली में कुल 611 रूट्स को कवर किया गया है। स्टेशन यार्ड में 91 टर्नआउट्स/ट्रैप्स पर काम किया गया है, जिनमें 87 नए टर्नआउट्स डाले गए।
प्रमुख विशेषताएं और तकनीकी बदलाव
आधुनिक सिग्नलिंग के तहत स्टेशन पर 44 मुख्य सिग्नल और 32 सी-ऑन सिग्नल लगाए गए हैं, साथ ही 28 डिप शंट और 23 इंडिपेंडेंट शंट सिग्नल भी स्थापित किए गए हैं। सुरक्षित ब्लॉक वर्किंग के तहत ब्लॉक वर्किंग के लिए अत्याधुनिक प्रणाली का उपयोग किया गया है, जो दो स्टेशनों के बीच ट्रेनों की आवाजाही को बेहद सुरक्षित बनाता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के तहत सात लेवल क्रॉसिंग गेटों (एलसी-59, 61, 62, 63-ए, 63-बी, 64 और 53) पर पुरानी व्यवस्था को हटाकर इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर की सुविधा से बदल दिया गया है।
इस तकनीक से यार्ड की वहन क्षमता बढ़ेगी। अब सिग्नल क्लीयरेंस में कम समय लगेगा, इससे ट्रेनों की रफ्तार और समयबद्धता में सुधार होगा, साथ ही यार्ड री-मॉडलिंग के बाद रनिंग लाइनों की संख्या भी बढ़ गई है। इससे धूरी जंक्शन पर ट्रेनों के क्रॉसिंग और ठहराव के दौरान होने वाली देरी से राहत मिलेगी।
विनोद भाटिया, डीआरएम अंंबाला।
अंबाला रेल मंडल के अधीन धूरी रेलवे स्टेशन से निकलती ट्रेन। रेलवे