अंबाला छावनी के सनातन धर्म मंदिर में भजन कीर्तन करते श्रद्धालु। संवाद
नवरात्र पर कालबाड़ी मंदिर, सनातन धर्म मंदिर में माता के दर्शन के लिए पहुंचे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा विधि-विधान से पूजा की गई। इस दौरान भक्त कालबाड़ी मंदिर, सनातन धर्म मंदिर सहित अन्य मंदिरो में माता के दर्शन के लिए लाइन में लगे रहे। इस दौरान मंदिरों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। सनातन धर्म मंदिर में पांच साल की कन्या का पूजन किया गया। इसके अलाव मंदिर में भजन कीर्तन और माता की आरती की गई। इसके बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
पंडित प्रवेश उनियाल ने बताया कि मां का यह स्वरूप वात्सल्य और शक्ति का अद्भुत संगम है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्र के पांचवें दिन की साधना का विशेष महत्व है। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में स्थित होता है।
मां का स्वरूप चतुर्भुज है, जिसमें वह बालरूप स्कंद को गोद में लिए हुए हैं। कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। इनका वर्ण पूर्णत शुभ्र है और सिंह इनका वाहन है। इस स्वरूप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनकी उपासना करने से बालरूप भगवान स्कंद की पूजा स्वयं हो जाती है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के नाते इनकी भक्ति से भक्त का व्यक्तित्व अलौकिक तेज और कांति से संपन्न हो जाता है। मां की शरण में आने से भक्त सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर परम शांति और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि पवित्र मन से मां की शरण में आएं, जिससे इस भवसागर के दुखों से मुक्ति मिल सके।