फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उपप्रबंधक, नंबरदार, एजेंट को तीन साल की कैद

Fri, 18 Jul 2014 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला
विज्ञापन
विज्ञापन
नारायणगढ़। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से फर्जी तरीके से कृषि लोन हड़पने के मामले में अदालत ने बैंक के तत्कालीन उपप्रबंधक सहित एक एजेंट और नंबरदार कोे दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है।
विज्ञापन


वीरवार को आए इस फैसले में तीनों दोषियों पर अदालत ने छह हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। 2007 में बैंक में हुए इस फर्जीवाड़े के संबंध में अक्तूबर, 2010 में मामला दर्ज हुआ था। स्टेट बैंक की स्थानीय कृषि शाखा से कुछ जालसाजों ने फर्जी कागजात तैयार कर कृषि लोन के नाम पर सात लाख रुपये हड़प लिए थे।

वर्ष 2007 में लिए इस कर्ज को जब लौटाया नहीं गया तो वर्ष 2009 में बैंक अधिकारियों ने मामले की पड़ताल की। इसमें यह बात सामने आई कि अपने आप को क्षेत्र के गांव कुराली वासी बताकर जिस किसान जगीर सिंह पुत्र इंद्र सिंह ने यह कर्ज लिया था, वह न तो कुराली गांव का बाशिंदा था और न ही उसके नाम कोई भूमि थी।
विज्ञापन


फर्जीवाड़े का पता लगने के बाद बैंक के तत्कालीन मैनेजर ने इस संदर्भ में एक मामला अदालत के निर्देश पर थाना नारायणगढ़ में दर्ज करवाया था जिसमें तथाकथित नंबरदार, एजेंट व अन्यों को नामजद किया गया था। बाद में इस सारे मामले में बैंक के तत्कालीन उपप्रबंधक की संल्पितता पाते हुए पुलिस ने उसके साथ-साथ नंबरदार व एजेंट को भी गिरफ्तार कर लिया था।

करीब चार साल चले इस ट्रायल में अभियोजन पक्ष की दलीलों को मानते हुए अदालत ने उपप्रबंधक, नंबरदार और एजेंट को 15 जुलाई को दोषी करार देते हुए सजा के लिए 17 जुलाई निर्धारित कर दी थी। वीरवार को अदालत ने उपरोक्त तीनों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई। बैंक की तरफ से पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश शर्मा ने इसकी पुष्टि की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें