दिल्ली से पंजाब लौट रहे किसान लखविंद्र सिंह ने बताया कि वह भी ट्रैक्टर मार्च में भाग लेने के लिए 23 जनवरी को अंबाला से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। 25 की सुबह धरना स्थल पर पहुंचे। जहां अंबाला के अन्य किसानों के साथ धरना स्थल पर ट्रैक्टर परेड को लेकर जत्थे बंदियों में बातचीत होती रही। रात करीब 12 बजे दिल्ली पुलिस की ओर से ट्रैक्टर परेड को लेकर रुट की जानकारी दी गई। उस समय अधिकतर किसान सो चुके थे। इसीलिए जत्थे बंदियों ने पुलिस द्वारा दी जानकारी व्हाट्स एप ग्रुप में डाल दी। करीब पौने घंटे बाद पुलिस द्वारा रुट को लेकर नई जानकारी दी गई। उसके बाद इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई। इससे पहले भेजा संदेश लोगों तक पहुंचा, लेकिन दूसरा संदेश इंटरनेट सेवा बंद होने के चलते नहीं पहुंच पाया। किसानों ने कहा कि वे घर वालों से मिलने के बाद फिर से सिंघू बार्डर के लिए रवाना हो जाएंगे।
12 बजे ट्रैक्टर रैली के दौरान पुलिस ने हमें नए रूट की जानकारी दी थी और इसके बाद इंटरनेट बंद कर दिया गया। इससे पहले पुलिस ने हमें जो सूचना दी थी उसे हम व्हाट्सएप ग्रुप में साझा कर चुके थे। दूसरा रूट इंटरनेट बंद होने के कारण हम अपने साथियों को नहीं बता सके। इसी कारण दिक्कतें हुई।
लखविंद्र सिंह, दिल्ली से लौटा किसान।
दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे लोग किसान हैं। कोई आतंकवादी नहीं अगर पुलिस को किसी के बारे में भी कोई खुफिया जानकारी मिलती है तो वह उसे गिरफ्तार कर सकती है। जिसमें किसानों की जत्थे बंदियां भी सहयोग करेंगी।
- दिलबाग सिंह, किसान।
दिल्ली समेत जहां भी किसान आंदोलन चल रहा है। हर जगह मंच से किसान नेता हर बार किसानों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यह आंदोलन किसानों का है। अगर कोई असामाजिक तत्व आंदोलन को खराब करने की कोशिश करेगा उसे बक्शा नहीं जाएगा। ऐसे में दिल्ली में उपद्रव करने वाले लोग किसान नहीं थे।
- कुलदीप सिंह, किसान ।