अंबाला। 136 साल पहले बना जमना दास जवाहर लाल मंदिर पर शिव भक्तों की गहरी आस्था है। मंदिर बनने के समय से ही यहां शिवलिंग भी स्थापित है। शिवरात्रि व सावन माह में रोजाना की तरह दूरदराज से भक्त आकर जलाभिषेक करते हैं और नतमस्तक होकर परिवार की सुख शांति के लिए मन्नतें मांगते हैं।
मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मंदिर में आकर मन्नत मांगता है तो वह अवश्य पूर्ण होती है। मंदिर की खासियत यह है कि आज भी पुराने समय का मुख्य द्वार है। सालों पुराना यह मुख्य द्वार अपने आप में इतिहास समेटे हुए है। जैसे-जैसे समय गुजरता गया मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई। सावन में सुबह व शाम मंदिर में होने वाली पूजा अर्चना में दूरदराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु परिवार संग पहुंचकर हाजिरी लगाते हैं।
50 साल पुरानी दुर्गा मां की मूर्ति हैं मुख्य आकर्षण का केंद्र
इस मंदिर का निर्माण 1882 में हुआ था। मंदिर में शिवलिंग व राम दरबार स्थापित हुआ था। मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में बढ़ती आस्था को देखते हुए मंदिर में करीब 50 साल पहले दुर्गा मां की मूर्ति स्थापित की गई थी। जो गुजरात के कारीगरों द्वारा बनाई गई है। यही नहीं मंदिर में सरस्वती माता, हनुमान जी के पवित्र स्वरूप भी स्थापित होते चले गए। मंदिर की स्थापना के समय छावनी के अंदर कुछ ही मंदिर थे और आबादी भी कम थी। समय के बदलाव के साथ लोगों में मंदिर के प्रति आस्था बढ़ती जा रही है। जो भी श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव के साथ नतमस्तक होता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।
लंबे समय से वह मंदिर से जुड़े हैं और खुद भक्तों की मनचाही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती दिखी। रोजाना मंदिर में पूजा अर्चना और वैदिक मंत्रों का जाप होता है। सुबह व शाम श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। शिवरात्रि पर भी पूजा अर्चना के बाद प्रसाद वितरित होगा। दूरदराज से भक्त आकर जलाभिषेक करेंगे।
हर्ष भैजवाल, मंदिर पूजारी।
यह मंदिर काफी पुराना है। बड़ी संख्या भक्त मंदिर में पहुंचकर माथा टेकते हैं। शिवलिंग का स्वरूप भी अन्य शिवलिंग से काफी बड़ा है। जमना दास जवाहर लाल मंदिर व सनातन धर्म महावीर दल ट्रस्ट दोनों ही मिलकर मंदिर चलाते है। मंदिर कमेटी के निर्णय के अनुसार समय-समय पर मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम करवाए जाते हैं।
अनिल मित्तल, प्रधान, मंदिर कमेटी, अंबाला।