सरकारी स्कूलों में मिड डे मील फंड को सीधे दुकानदारों के खाते में डालने का फैसला विभाग ने वापस ले लिया है। जिसका प्राथमिक शिक्षक संघ ने स्वागत किया है। अब मिड डे मिल का पैसा सीधे दुकानदारों के खाते में न जाकर स्कूल के ही फंड के खाते में ही आएंगे।
दरअसल विभाग की ओर से विद्यालयों से एक प्रोफार्मा मांगा गया था। जिसमें जिस दुकान से सामान या दूध खरीदा जाएगा। उसका चालू खाता व फर्म का नाम विभाग ने मांगा था। शिक्षक संघ ने इसका विरोध जताते हुए कहा था कि गांवों में स्थानीय दुकानों से या स्थानीय दूध वाले से दूध लिया जाता है। जिनके चालू खाते उपलब्ध कराना बहुत मुश्किल है। जबकि पहले मिड डे मील के लिए एक खाता खुला था। जिसमें मिड डे मिल का फंड उपलब्ध होता था। इसे विभाग द्वारा बंद करवा दिया गया है, जबकि यह फंड उसी खाते में आना चाहिए, जिससे किसी को भी परेशानी नहीं होगी। खंड प्रधान तरविंद्र शर्मा ने राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से विभाग के इस नए फैसले को एक सराहनीय कदम बताया है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जो यह आदेश जारी किया गया है। इसके अनुसार अब स्कूल के ही किसी भी फंड खाते का ब्यौरा देना होगा। जिसमें मिड डे मिल की फंड राशि आएगी। इससे स्कूल शिक्षकों को भी राहत मिलेगी और बच्चों को मिड डे मिल सुचारू रूप से मिल पाएगा।