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मृत्यु शरीर का अंत है, आत्मा का नहीं : स्वामी ज्ञान नाथ

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अंबाला के दुखेड़ी गांव में प्रवचन सुनती संगत। प्रवक्ता
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खेड़ी गांव में आयोजित हुआ सत्संग
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। निराकारी जागृति मिशन के चेयरमैन और महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने कहा कि यह संसार रात के सपने के समान क्षणभंगुर है। यहां कुछ भी स्थिर नहीं है। दुखेड़ी गांव में आयोजित सत्संग में उमड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने जीवन-मृत्यु के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला।
महामंडलेश्वर ने कहा कि मृत्यु शरीर का अंत है, आत्मा का नहीं। यह जीवात्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का उदाहरण देते हुए समझाया कि शरीर नष्ट होने पर ये तत्व पुनः ब्रह्मांड में विलीन हो जाते हैं लेकिन चेतन आत्मा अपने कर्मों के अनुसार नया आधार ढूंढती है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि मोक्ष कोई मंजिल नहीं, जिसे कहीं जाकर प्राप्त किया जाए। यह स्वयं में विश्राम करने की एक अवस्था है। जब मनुष्य अपेक्षाओं, उपेक्षाओं और तुलनात्मक बंधनों से मुक्त होकर भीतर से शांत और विकार-शून्य हो जाता है, तभी उसे अद्वैत का बोध होता है। उन्होंने कहा कि सच्चा ब्रह्मज्ञानी वह है, जो संसार में रहकर भी उससे लिप्त नहीं होता। बाहर से साधारण दिखने वाला ऐसा व्यक्ति भीतर से असीम आनंद में डूबा रहता है और जीते-जी मुक्ति का अधिकारी बन जाता है। इस अवसर पर भारी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।
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