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जंडली मार्केट में पसरा सन्नाटा खींच रहा दुकानदारों के माथे पर चिंता की लकीरें

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अंबाला सिटी। जंडली स्थित मार्केट में इन दिनों सन्नाटा पसरा हआ है। कभी इस मार्केट में ग्राहकों की इतनी चहल होती थी कि इसकी तुलना देखने वाले दिल्ली के चांदनी चौक मार्केट से करते थे। शहर के दूसरे छोर पर आबाद इस मार्केट में करीब 300 दुकानें हैं, जिसमें कुल मिला कर हर उस चीज की दुकान शामिल है, जिसकी जैसी जरूरत वैसी दुकान। इस मार्केट के कामयाब होने के पीछे सबसे बड़ा हाथ साथ लगते आर्मी एरिया का है। वहीं इस मार्केट के आस पास बनी करीब आधा दर्जन आबाद कॉलोनियों के लोग भी शहर जाने की बजाए घर के नजदीकी बसी इसी मार्केट से खरीदारी करना उचित समझते हैं। लेकिन आजकल इस मार्केट में ग्राहक कम ही दिखाई दे रहे हैं। जब मार्केट में होने वाले कारोबार को लेकर बातचीत की गई तो लोगों ने हाल बयां करते हुए बताया कि पहली दोनों लहरों के कारण लोगों ने तीसरी लहर की संभावना के चलते मार्केट से दूरी बना ली है। यही कारण है कि मार्केट में मंदी का दौर चल रहा है।
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लॉकडाउन में तो वैसे भी दुकानें बंद थी, सोचा था कि अनलॉक होने के बाद शायद काम निकलना शुरू हो जाएगा। लेकिन मार्केट खुले करीब एक माह होने को है पर ग्राहक नहीं आ रहा है। हम दो भाई हैं एक कर्मचारी है ऐसे समय में घर का खर्च भी मुश्किल से चल रहा है। ऊपर से तीसरी लहर का अंदेशा डरा रहा है।
- मोहन निधि, जूता कारोबारी।
हमारा काम खाना सप्लाई करने का है, जो कि ट्रेनों में सप्लाई होता है। जब से ट्रेनें बंद हुई हैं तब से काम में मंदी चल रही है। हमारे पास चार कर्मचारी हैं जिनमें से अभी दो कर्मचारी काम पर रखे हुए हैं। बाकी दो कर्मचारी घर पर गए हुए हैं। अब जब ट्रेन शुरू होंगी तो काम चलेगा तब जाकर कुछ राहत मिलेगी।
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- गौरव, पेंट्री कारोबारी।
हमारी कपड़े की दुकान है, हमारे काम में बहुत भारी मंदा चल रहा है। इस समय काम सिर्फ 10 प्रतिशत ही रह गया है। क्योंकि हमारा काम भी शादियों पर निर्भर है। अब शादियां ही बंद हैं तो काम में भारी गिरावट आ गई है। कई बार तो पूरा दिन खाली बैठे कर घर जाने को मजबूर हैं।
- हन्नी, कपड़ा कारोबारी।
मेरे पास दो वाहन हैं जो मैंने स्कूल में बच्चों के लिए लगाए हुए थे। अब करीब डेढ़ साल से स्कूल बंद होने से खाने के लाले पड़ गए थे। अब दूसरा काम करने को मजबूर होना पड़ा है। ऐसे में ऊपर से बच्चों की फीस, घर के अन्य खर्चे निकालने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा।
- मन्नी, स्पेयर पार्ट की दुकान संचालक।
कोरोना व लॉकडाउन के कारण काम में मंदी का दौर चल रहा है। ऊपर से तीसरी लहर को लेकर हर आदमी सहमा हुआ है। शायद इसलिए अभी लोग मार्केट में कम निकल रहे हैं। आमदन से ज्यादा खर्चा होने के कारण आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता साफ दिखने लगा है।
- राजिंद्र सिंह रावत, गिफ्ट गेलरी संचालक।
मार्केट में हर जगह मंदी का दौर चल रहा है। फिर भी घर बैठ कर खर्चा निकालना नामुमकिन है। यही सोच कर दुकान अभी दो दिन पहले ही खोली है। क्योंकि अभी शादियां भी नहीं हैं तो इसलिए काम में मंदी का दौर जारी है। लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम है यही सोच कर हमने भी नई दुकान खोली है।
- कुणाल, तस्वीरों की दुकान संचालक।
हमारा दर्जी का काम है, हम पिछले करीब डेढ़ साल से मंदी की मार झेल रहे हैं। पहले एक दिन में चार से पांच ग्राहक आ जाते थे। लेकिन अब तो चार दिन में मुश्किल से एक ग्राहक ही आ रहा है। लॉकडाउन से पहले सिलाई हुए कपड़े अभी तक दुकान पर टंगे हैं। ग्राहक को फोन करो तो कहते हैं कि अभी पैसे ही नहीं हैं।
- आनंद, दर्जी की दुकान संचालक।
इस मार्केट का सारा काम शादियों व आर्मी पर्सन पर निर्भर रहता है। अब न तो शादियां ही हो रही हैं। न ही आर्मी के लोग ही बाहर मार्केट में निकल रहे हैं। जिसकी वजह से मार्केट मंदी की मार झेल रही है। क्योंकि तीसरी लहर को लेकर भी लोगों के मन में खोफ पैदा हो रहा है। तो काम के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
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- राजेश संगर, जंडली मार्केट उप प्रधान।
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