फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आफत बने अनापत्ति प्रमाण पत्र, वैध कॉलोनियों में ही अवैध बताई जा रही प्रॉपर्टी

विज्ञापन
विज्ञापन
राकेश बनवाल
विज्ञापन

अंबाला सिटी। नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनडीसी) लेना शहरवासियों के लिए आफत बना गया है। करीब छह से आठ माह से नगर निगम में एनडीसी लेने के लिए चक्कर पर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। लिहाजा न तो लोगों के मकानों की रजिस्ट्री हो पा रही है न ही दुकान और प्लाट की। हालात यह हैं कि लोगों ने रजिस्ट्री करवाने से पहले लाखों रुपये देकर बयाना तक करवा लिया है, ऐसे में एनडीसी जारी नहीं होने से उनकी खून-पसीने की कमाई अटकी पड़ी है। लोगों को बताया जा रहा है कि आपके मकान, दुकान, प्लाट इत्यादि का खसरा नंबर पोर्टल पर नहीं चढ़ा हुआ है, वह अवैध है। इसीलिए एनडीसी जारी नहीं किया जा सकता। लेकिन जब जनता बोलती है कि हमारी कॉलोनी तो वैध है इसका निगम कर्मचारियों के पास कोई जवाब नहीं होता। एनडीसी लेने आए कई लोगों का तो यह भी कहना है कि हम करीब 10-15 सालों से निगम को टैक्स दे रहे हैं। हमारा घर व हमारी कॉलोनी अवैध कैसे हो गई। एनडीसी पोर्टल जारी करते हुए दावे किए गए थे कि आवेदनकर्ता को 10वें दिन एनडीसी जारी कर दी जाएगी, लेकिन 10वें दिन लोगों को एनडीसी की बजाए रिजेक्शन फाइल थमाई जा रही है। रिजेक्शन की सूचना संबंधित व्यक्ति के मोबाइल पर भी नहीं दी जा रही।
कहां आ रही हैं दिक्कतें
दरअसल नगर निगम ने एनडीसी पोर्टल शुरू करवाने से पहले एक कंपनी से प्रॉपर्टी का सर्वे करवाया था। इसी सर्वे के बाद नगर निगम के पोर्टल पर सभी कॉलोनी और प्रॉपर्टी की आईडी बनाकर अपलोड कर दी गई थी। लेकिन इस सर्वे में बहुत से खसरा नंबर को बीच में ही छोड़ दिया गया। इसी कारण एक ही कॉलोनी में वैध और अवैध प्रॉपर्टी दर्शायी जा रही है।
विज्ञापन

लोग बोले-
मुझे अपनी जमीन बेचनी है, जिसकी रजिस्ट्री भी मेरे नाम पर है। जब मैं तहसील में गया तो वहां मुझे बताया गया कि पहले निगम से एनडीसी लेकर आओ। उसके बाद मैंने इसी माह 8 तारीख को निगम में एनडीसी के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया था। जिसके बारे में मुझे कोई सूचना विभाग की ओर से नहीं दी गई। मंगलवार को पता करने गया तो कह रहे हैं कि आपकी फाइल रिजेक्ट हो गई है। क्यों रिजेक्ट हुई इस बात की जानकारी भी कोई नहीं दे रहा है।
-करनैल सिंह, रणजीत नगर
मैं अपनी ही जमीन को अपने बेटे के नाम नहीं करवा पा रहा हूं। एनडीसी लेने के लिए करीब आठ माह से निगम के बाबुओं के चक्कर काट रहा हूं। अभी तक मुझे एनडीसी तो दूर की बात है यहां से मुझे कोई संतोष जनक जवाब तक नहीं मिल पाया है। नवंबर से लेकर आज तक कोई न कोई कमी निकाल कर मेरे काम को लटकाया जा रहा है। भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मैं कागज पूरे करते-करते थक गया, लेकिन निगम की कागजों की मांग अभी तक भी पूरी नहीं हुई
-बोधराज।
मैं अपने प्लाट की एनडीसी लेने के लिए इसी माह आठ तारीख को आया था। उस समय पहले तो एक-दो दिन किसी ने कुछ नहीं बताया। उसके बाद किसी ने बताया कि अपने घर का प्रापर्टी टेक्स की रसीद व अन्य दस्तावेज लगा कर बाहर साइबर कैफे से ऑनलाइन आवेदन कर दो। फिर 10 दिन के भीतर एनडीसी मिल जाएगी। आज आवेदन किए करीब 20 दिन होने वाले हैं, लेकिन आज तक मुझे एनडीसी नहीं मिली। हर रोज दिहाड़ी तोड़ कर आना पड़ता है। उसके बाद भी काम नहीं हो पा रहा है।
-राजेश कुमार।
हमने अपने घर की एनडीसी लेनी थी, जिसकी फाइल चलते-चलते आज करीब दो महीने हो चुके हैं। इन दो महीनों में निगम ने चार बार फाइल रिजेक्ट कर दी। पहले कहते थे कि जो आपने आवेदन किया है सिस्टम में उसका प्रिंट ही साफ नहीं दिख रहा है। आप असली रजिस्ट्री लेकर आओ। उसके बाद बिल्डिंग ब्रांच में असली दस्तावेज भी दिखा दिए। फिर से वही फाइल रिजेक्ट करने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। अब कह रहे हैं कि आपकी फाइल अभी अंडर प्रोसेस है।
विज्ञापन

-मयंक।
प्रॉपर्टी आईडी से संबंधित जो भी दिक्कतें हैं, उन्हें 10 दिन के भीतर ठीक कर दिया जाएगा। इसके लिए कंपनी को बोल दिया गया है। जल्द ही शहरवासियों को इस तरह की दिक्कतों से निजात मिल जाएगी।
धीरेंद्र खडगटा, निगम आयुक्त।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें