अंबाला सिटी। जमीन निकल गई या खा गया आसमान? पांच साल से लगातार रोजाना एक से अधिक व्यक्ति जिले में लापता हो रहे हैं। शासन से लेकर प्रशासन और पंडितों से लेकर पीर-फकीर तक अपनों की तलाश में परिजन हर उस जगह जा चुके हैं जहां से उन्हें उम्मीद थी कि शायद वहां से लापता होने वालों की जानकारी मिल जाए। लेकिन इंतजार आज भी जारी है। बड़ी बात यह है कि लापता होने वालों में पुुरुषों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात है कि इनमें बालिग महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। इनमें 6 मामले ऐसे भी सामने आए जब गुमशुदा हुए लोगों की शव बरामद हुए। उनकी हत्याएं कर दी गईं थीं।
महिलाओं की बजाए पुरुष ज्यादा बरामद हुए
पुरुषों की बात करें तो इस अवधि में कुल 897 बालिग और नाबालिग पुरुष गायब हुए। इनमें से 173 नाबालिग थे, जिनमें से 67 अभी गायब हैं। इसी तरह 724 बालिग में से 414 लापता हैं। इस तरह आंकड़ों के मुताबिक 57 फीसदी बालिग और नाबालिग पुरुषों को पुलिस ने तलाश लिया है जबकि बरामद हुई महिलाओं का औसत 44 फीसद है।
पांच साल में ऐसे गायब हुई महिलाएं
2016 में 0-18 उम्र की 29 लापता बेटियों में से 23 तलाशी गईं। जबकि 6 अभी लापता हैं। बालिग
लापता 78 महिलाओं में से 42 ढूंढी, 36 अनट्रेस हैं।
2017 में लापता 39 नाबालिग बेटियों में से 13 नहीं मिली। बालिग उम्र की लापता 122 महिलाओं में से 50 को पुलिस नहीं तलाश सकी।
2018 में गायब 38 नाबालिग बेटियों में से 11 की तलाश जारी है। बालिग 175 लापता महिलाओं में से 64 अभी गायब हैं।
2019 की 0-18 आयु वर्ग में लापता 50 बेटियों में से 32 की दो साल बाद भी तलाश अधूरी है। बालिग उम्र की 257 महिलाओं में से 178 का अभी तक सुराग नहीं लगा।
2020 में लॉकडाउन के बावजूद गायब हुई 49 नाबालिग बेटियों में से 50 फीसद से अधिक 26 को पुलिस नहीं तलाश पाई। 208 गायब महिलाओं में से 100 की तलाश जारी है।
2021 में फरवरी तक 18 साल से कम आयुवर्ग की 11 बेटियों में से चार की मिल पाई। 7 अभी गायब हैं। 20 महिलाओं में से 14 की तलाश जारी है।
लापता पुरुषों का आंकड़ा
2016 में गायब हुए 34 नाबालिग बच्चों में से 9 अभी नहीं मिले। 71 लापता बालिग में से 42 की तलाश बाकी है।
2017 में लापता 33 नाबालिग बच्चों में से 20 अभी नहीं मिले। बालिग 119 पुरुषों में से 77 गायब हैं।
2018 में गायब 41 नाबालिग में से 7 अभी गायब हैं। अधिक आयुवर्ग के 151 में 65 को ढूंढा जा रहा है।
2019 में 0-18 साल तक के 29 बच्चों में से 17 नहीं मिले। ज्यादा उम्र के 193 लापता में से 125 की तलाश बाकी है।
2020 की बात करें तो 24 लापता नाबालिग बच्चों में से 7 का सुराग नहीं मिला। जबकि अधिक उम्र के 173 में से 98 की तलाश जारी है।
2021 में फरवरी तक 0-18 आयुवर्ग में लापता 12 बच्चों में से 7 नहीं मिले। बालिग 17 व्यक्तियों में से 7 को ढूंढा जा रहा है।
आंकड़ों की जुबानी 5 साल की कहानी
2016 में 212 लापता, 93 की तलाश जारी
2017 में 313 लापता, 168 को नहीं तलाश पाई पुलिस
2018 में 405 लापता, 147 अभी नहीं मिले
2019 में 531 लापता, 352 की तलाश जारी
2020 में 454 लापता, 231 की तलाश बाकी
2021 में फरवरी तक 60 लापता, 35 को ढूंढना बाकी
लापता लोगों की हत्याएं भी हुई
कुछ वर्ष पूर्व जग्गी गार्डन से जेवर के बिजनेस के सिलसिले में लालड़ू गए युवक के परिवार ने गुमशुदगी की रपट दर्ज कराई। वहीं बदमाशों ने साजिशन लूट की नीयत से हत्या कर उसका शव जमीन में गाड़ दिया था।
कालाआंब के पास नाबालिग खेलते-खेलते गायब हो गया था। गुमशुदगी के केस में हत्या कर शव नाले के पास फेंक दिया गया था।
गांव रूपो माजरा में सिंचाई विभाग के अधिकारी की पत्नी ने प्रेमी के साथ उसकी हत्या कर शव नहर किनारे फेंक गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन जांच में घटना खुल गई थी।
नई कार लेकर निकले बब्याल वासी 40 वर्षीय गुमशुदा का अधजला शव मिला। दोस्तों ने हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शव पर तेल छिड़क कर आग लगा दी थी।
पिछले साल दुराना से मेले में काम के लिए गए गुमशुदा युवक की हत्या कर दी गई। बाद में मामले में हत्या की धारा लगाकर आरोपी गिरफ्तार किए गए थे।
14 मार्च को गांव धनाना का 22 वर्षीय अनिल लापता हुआ था। इसके बाद 16 मार्च को उसका शव शहजादपुर में बीडीपीओ कार्यालय के पीछे जंगलों से मिला था। अनिल की हत्या के बाद शव को यहां फेंक दिया गया था।
बच्चे उम्मीदें पूरी न होने, कोई नशे की लत, अवैध संबंधों, मान न मिलने, मानसिक तनाव के कारण घर छोड़ते हैं। ऐसे मामले में कमी लाने के लिए काउंसलिंग आवश्यक है। परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर एक-दूसरे का दर्द साझा करें, अपने दिल की बात करें और आत्मीयता बरतें। परिवार के सदस्यों को लगना चाहिए कि उनका कोई अपना है जो उनका ध्यान रखता है।
- डॉ. कुलदीप सिंह, मनोवैज्ञानिक।
बच्चे डिमांड न पूरी होने, युवक-युवतियां शादी के लिए तो कुछ महिलाएं दूसरे से प्रेम के कारण घर से जेवर व नकदी लेकर चली गईं। इसके अलावा ऐसे भी मामले सामने आए जिनमें बुजुर्गों को बच्चों से उचित मान-सम्मान नहीं मिला। मानसिक, आर्थिक परेशानी झेलने में असमर्थ लोगों ने भी परिवार को छोड़कर जाना उचित माना। नाममात्र केसों में लापता व्यक्ति की हत्याएं कर दी। ऐसे केसों को हत्या की धारा में तब्दील करके आरोपियों को पकड़कर जेल भेजा जा चुका है। अनसुलझे केसों को सुलझाने की कोशिशें जारी हैं।
- हामिद अख्तर, एसपी, अंबाला।