अंबाला। गांधी मेमोरियल (जीएमएन) कॉलेज में वीरवार को अमर उजाला फाउंडेशन के तहत अपराजिता कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें विशेषज्ञों ने छात्राओं को डिजिटल युग में खुद को जागरूक रहने की जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने की।
उन्होंने बताया कि कोविड के बाद से इंटरनेट का प्रयोग काफी बढ़ा है। इस पर हमारी निर्भरता अधिक हो गई है। ऐसे में हमें इसके फायदे व नुकसान की जानकारी से भलीभांति परिचित होना जरूरी है। इस दौरान कॉलेज की छात्राओं को डिजिटल तरीकों के प्रति सचेत होने, सोशल मीडिया पर हो रहे दुष्प्रचार व धोखाधड़ी से बचने के लिए जागरूक किया।
प्राचार्य व अन्य वक्ताओं ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सोच, समझ और विश्वास के आधार पर ही हम साइबर अपराध से बच सकते हैं। ठगी करने वाले नित नए तरीके अपना रहे हैं जोकि हमारी सोच से हटकर हैं। इसलिए हम जल्दी ही ठगी के शिकार बन जाते हैं और इसकी जानकारी बाद में मिलती है। विशेषज्ञों ने छात्राओं को प्रेरित किया कि वो अपने अंदर आत्मविश्वास रखें और कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी हो तो इसे सोशल मीडिया पर साझा न करें।
पिछले कुछ मामलों में ऐसा सामने भी आया है कि फोटो पर चेहरा बदलकर किसी छात्रा को सोशल मीडिया पर इतना बदनाम कर दिया कि उसे अंत में अपना जीवन ही खत्म करना पड़ा। वहीं वक्ताओं ने कहा कि आजकल के बच्चों में आत्मविश्वास की कमी है। दूसरे से बेहतर नजर आने की होड़ में वो कई बार ऐसी गलती कर लेते हैं, जिसे सुधारना नामुमकिन हो जाता है। इसकी आत्मग्लानि में कई बार बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं। इसलिए कभी कुछ ऐसा हो तो इसे अपने शिक्षकों व परिजनों के साथ जरूर साझा करें।
खुद को मोबाइल में किया कैद
आज के दौर में बच्चा हो या बुजुर्ग सभी ने अपने आप को मोबाइल में कैद करके रख लिया है। चाहे वो कक्षा हो, पार्क हो या फिर कार्यस्थल, सभी ने सोशल मीडिया को अपने ऊपर हावी कर लिया है। इसके अलावा कुछ अन्य नए एप हैं जोकि बच्चों पर बुरा प्रभाव छोड़ते हैं। इसलिए कभी किसी नए एप को मोबाइल में डाउनलोड करने से पहले इसकी सच्चाई जरूरी जान लें। सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी फोटो और वीडियो डाली जाती है, ताकि इससे उत्सुकता बढ़ जाए और मोबाइल देखने वाला या तो तनाव में आ जाए या फिर कुछ गलत कर डाले।
डॉ अनुपमा, वक्ता।
सावधानी पूर्वक करें इस्तेमाल
कुछ दिन पहले मेरे मोबाइल पर एक फोन आया। फोन का नंबर मेरे पति का था और आवाज भी उनकी थी। फोन करने वाले ने मुझसे ओटीपी मांगा। शक होने के बाद जब मैंने पति को फोन किया तो उन्होंने बताया कि उसने किसी प्रकार का कोई भी ओटीपी नहीं मांगा और न ही मोबाइल पर कुछ किया है। यह तो एक उदाहरण मात्र है। मोबाइल पर अंजान व्यक्ति से अगर दो मिनट से ज्यादा बात की तो इससे भी लोगों को नुकसान हो सकता है। डिजिटल सुविधा जितनी आसान लगती है, वो उतनी ही कठिन है। इससे सावधानी पूर्वक इस्तेमाल करने की जरूरत है।
नैंसी मदान, वक्ता।
आईडी हैक करना बेहद आसान
किसी भी सोशल मीडिया की आईडी को हैक करना बेहद आसान होता है, क्योंकि हम कई बार इसे अपने मोबाइल के पीछे लिख देते हैं या फिर पर्ची रख लेते हैं। वहीं आईडी के तहत अपना मोबाइल नंबर, जन्म तारीख और अन्य कुछ जानकारी दर्ज कर लेते हैं, जिसे आसानी से हैक किया जा सकता है। पासवर्ड ऐसा रखो जोकि बिल्कुल अलग हो और सिर्फ इसकी जानकारी उनके पास हो। आज के कार्यक्रम से काफी जानकारी मिली है। इसे दोस्तों, रिश्तेदारों व परिजनों से जरूर साझा करुंगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक किया जा सके।
-गुरनीत कौर, छात्रा।