कालेधन पर सरकार की सख्ती के बाद अब बेनामी संपत्तियों पर कार्रवाई की आहट हो रही है। ऐसे में प्रापर्टी में दूसरों के नाम पर इनवेस्ट करने वालों की धड़कने तेज हैं, जबकि यह कारोबार काफी मंदी से गुजर रहा है। ऐसे में प्रापर्टी व्यवसाय में जुड़े लोग भी फिलहाल खाली बैठे हैं, जबकि सरकार के रुख का इंतजार कर रहे हैं। यह स्थिति अभी सुधरने वाली नहीं हैं, जबकि सरकार का रुख पूरी तरह से साफ नहीं हो जाता।
प्रापर्टी इनवेस्ट में लोगों की दिलचस्पी
प्रॉपर्टी में इनवेस्ट करना सबसे सेफ माना जाता था और यही कारण थे कि प्रापर्टी के रेट कलेक्टर रेटों से कहीं अधिक कीमत थी। प्रापर्टी के दाम भी लगातार बढ़ रहे थे और इसी कारण से पिछले करीब एक दशक से लोगों ने अपने परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर प्रापर्टी में इनवेस्ट करना शुरु कर दिया था। कई तो दूसरों के नाम पर प्लाट आदि खरीदकर छोड़ दिए और उम्मीद थी कि कुछ सालों के बाद इनकी कीमत कहीं अधिक हो जाएगी। लोग अपनी रकम को एकाएक दो से कई गुणा करने के लिए प्रापर्टी में इनवेस्टमेंट सबसे बेहतर विकल्प मान रहे थे। लेकिन अब जिस तरह से सरकार ने कालेधन पर सख्ती शुरू की है, उससे आहट है कि बेनामी संपत्तियों पर भी नजर है।
यह है स्थिति
प्रापर्टी कंसलटेंट का काम करने वाले धीरज वालिया, मनोहर लाल, विक्की, रंजीत सिंह का कहना है कि अभी प्रापर्टी का कारोबार काफी ठप पड़ा है। बीस से तीस परसेंट ही काम बचा है, जबकि जिन्होंने प्रापर्टी में इनवेस्ट करने की सोची थी, उन्होंने प्लानिंग अब टाल दी है। इसके साथ ही बेनामी संपत्तियों पर कार्रवाई की आहट से वे लोग भी सहमे हैं, जिन्होंने परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर यह सब प्रापर्टी खरीदी थी। दूसरी ओर कईं तो ऐसे हैं, जो अपनी प्रापर्टी इस डर से बेचने में जुटे हैं कि कहीं प्रापर्टी के दाम न गिर जाएं और जो फायदा वे सोच कर बैठे थे, उसमें घाटा न हो जाए। नए खरीददार काफी कम हैं, जबकि सरकार के रुख के बाद ही यह कारोबार रफ्तार पकड़ेगा, जबकि इस में काफी समय लग सकता है।