नोटबंदी का असर यहां के बड़े उद्योगों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। देश और विदेश में जहां इन उद्योगों के करोड़ों के आर्डर करेंसी चेंज होने की वजह से फंस गए हैं, वहीं उद्यमियों में भी इस माहौल को लेकर अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। कारोबार एकदम से ठंडा हो गया है और उद्यमी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जल्द से जल्द मार्केट में पांच सौ और दो हजार के नोट की उपलब्धता आसान हो।
विभिन्न उत्पादों की इंटरनेशनल मार्केट है अंबाला
अंबाला में विभिन्न उत्पादों की नेशनल ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल मार्केट मौजूद है। सबसे बड़ी साइंस इंडस्ट्री, जिसके एजुकेशनल, रिसर्च और मेडिकल उपकरण देश ही नहीं अमेरिका, अफ्रीका, अरब, यूपी और आस्ट्रेलिया के विभिन्न देशों तक सप्लाई होते हैं। इसी के चलते अंबाला कैंट साइंस सिटी के नाम से भी प्रख्यात है। इसी तरह देश का बड़ा मिक्सी उद्योग भी अंबाला में ही मौजूद है। प्रदेश का बड़ा दवा उद्योग और सराफा उद्योग भी अंबाला में ही मौजूद है। कई दवा इकाइयां तो ऐसी हैं, जिनकी सप्लाई देश ही नहीं दुनिया के 5 से 23 देशों तक होती है।
इसी तरह नार्थ इंडिया का सबसे बड़ा थोक कपड़ा बाजार भी अंबाला सिटी में ही मौजूद है। देशभर के विभिन्न राज्यों से थोक कपड़ा यहां आता है और यहां से नार्थ इंडिया के विभिन्न शहरों में सप्लाई होता है।
कारोबारियों, उद्यमियों के माथे पर चिंता की लकीरें
साइंस मार्केट
साइंस उद्यमी राकेश गुप्ता, अश्वनी गोयल व अमरजीत सिंह कहते हैं कि इस करेंसी एकदम चेंज होनी की वजह से कारोबार एकदम से प्रभावित हुआ है। काफी आर्डर अटक गए हैं। साइंस कारोबारी ज्ञानचंद अग्रवाल व राजीव अग्रवाल कहते हैं कि उनकी पेमेंट अटक गई गई है। चेक भी आसानी से कैश नहीं हो रहे हैं और चेक भी ज्यादा बड़ी अमाउंट के एकदम से बैंकों द्वारा लिए भी नहीं जा रहे हैं। साइंस कारोबारियों के लिए कच्चा माल खरीदना, अपने लेबर का मेहनताना देना, सबकुछ मुश्किल सा हो गया है।
दवा व मिक्सी कारोबार
दवा कारोबारी जीडी छिब्बर कहते हैं कि दवा सेक्टर भी इस नोटबंदी की वजह से काफी डिस्टर्ब चल रहा है। सबसे बड़ी समस्या है कच्चे माल की और लेबर की। दूसरा, विभिन्न देशों में दवाओं की सप्लाई गई हुई है, वहां से पेमेंट विभिन्न माध्यमों से पहुंचती हैं, लेकिन बैंकों के पास आम जनता से ही फुर्सत नहीं है, कारोबारियों की कौन सुनेगा। कई बड़ी अमाउंट के चेक फंसे हुए हैं और कारोबार एकदम से गड़बड़ाया हुआ है। मिक्सी कारोबारी बाबू राजेंद्रनाथ कहते हैं कि ये फैसला तो देशहित में है, लेकिन इससे आम जनता के साथ-साथ उद्यमियों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। पांच सौ और एक हजार का नोट एकदम से बंद होने से पेमेंट और आर्डर दोनों काफी प्रभावित हो रहे हैं।
कपड़ा और सराफा बाजार
कपड़ा कारोबारी पूर्ण चंद शर्मा, अंकुर व राजेंद्र कुमार के अनुसार सिटी में मौजूद सबसे बड़ा थोक कपड़ा बाजार में भी जबरदस्त मंदी का माहौल है। उत्तराखंड, वेस्टर्न यूपी, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू, पंजाब व चंडीगढ़ से इन दिनों काफी ग्राहक यहां पहुंचता था, क्योंकि इन दिनों मैरिज सीजन चल रहा है। लेकिन इस बार अपेक्षाकृत भीड़ कम हैं, वजह है नोटबंदी। अमूमन ग्राहक यहां माल नगदी में ही उठाते हैं, लेकिन थोक बाजार में पुरानी करेंसी नहीं ली जा रही है और बड़े नोट बाजार में पर्याप्त उपलब्ध नहीं है। जिस वजह से कपड़ा कारोबारी बहुत ज्यादा परेशान है और मंदी टूटने का इंतजार कर रहे हैं। उनके अनुसार मैरिज सीजन में भी बाजार से ग्राहकों की रौनकें गायब हैं।
सराफा कारोबारी सुनील वर्मा और रमन कहते हैं कि सराफा कारोबार पर तो इस नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर है। उनका तो कारोबार भी ठप हो गया है। ग्राहक ही गायब हैं, मैरिज सीजन में भी वे लोग खाली बैठे हैं। उनके अनुसार मार्केट में जल्द पांच सौ और दो हजार के पर्याप्त नोट आने चाहिए।
एटीएम मशीनों पर लगी रही लंबी कतारें
रविवार को अधिकतर एटीएम तो बंद ही रहे। लेकिन एसबीआई और पीएनबी के कुछ एटीएम खुले दिखाई दिए। जिस वजह से उन एटीएम मशीनों पर बहुत ही लंबी लाइनें लगी रही। एटीएम से रुपये निकलवाने आए सुरेश कुमार, जगदीश, मुकेश शर्मा, अनिल तिवारी, राजीव, प्रीतम, कंचन लांबा, जसपाल, संजय, पप्पू, हरपाल ने बताया कि वे लोग दो घंटे से ज्यादा समय से लाइन में खड़े हैं, लेकिन उन्हें एटीएम से कैश नहीं मिला। उन्होंने बताया कि वे लोग कई दिनों से भटक रहे हैं, न तो बैंकों में आसानी से कैश मिल रहा है और न ही एटीएम केंद्रों पर। उन्होंने सरकार से मांग की है कि कालाधन पर नकेल कसने को पुरानी करेंसी बंद करना ठीक है, लेकिन अब इस वजह से जो आम जनता को परेशानी हो रही है, उसका भी समाधान जल्द किया जाए, तो बेहतर होगा।