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Ambala News: बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनों में बढ़ रही भीड़

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अंबाला। त्योहारों के दौरान रेलवे की ओर से की गई व्यवस्था के दावे कागजों तक ही सिमट गए हैं। धरातल पर कोई प्रबंध नजर नहीं आ रहे। रविवार को प्लेटफार्म दो और तीन पर आई ट्रेनों में अव्यवस्थाओं ने एक बार फिर रेलवे की ओर से तैयार की गई योजनाओं की पोल खोल कर रख दी। टिकट लेने के बाद भी न तो यात्री कोच में सवार हो पाए और न ही वो दरवाजा खुलवा पाए। यह हालात अंबाला मंडल के सबसे बड़े और व्यस्त अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर देखने को मिले।
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नजर नहीं आए कर्मचारी
रेलवे ने 25 अक्तूबर से विभागीय अधिकारियों की रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी लगाई है कि वो आरपीएफ के साथ मिलकर व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे, लेकिन रविवार को न तो जिम्मेदार अधिकारी नजर आए और न ही सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े कर्मचारी। जनरल टिकट यात्री ट्रेन में सवार होने के लिए कोच के अंदर बैठे यात्रियों से अनुरोध करते रहे कि वो बंद दरवाजे को खोल दें लेकिन अंदर बैठे यात्रियों को उनकी पीड़ा नजर नहीं आई और वो बेबसी की तस्वीर बन कर रह गए। यह लापरवाही यात्रियों की नहीं बल्कि जिम्मेदारी अधिकारियोें की थी जो अपना कार्य लग्न से नहीं कर पाए।
एक-दूसरे पर फोड़ते रहे ठीकरा
प्रत्येक वर्ष ऐसी परेशानी यात्रियों को झेलनी पड़ती है। यात्री रेलवे टिकट लेते हैं लेकिन वो ट्रेन में सवार नहीं हो पाते। वहीं दूसरी तरफ अनारक्षित टिकटों पर आरक्षित श्रेणी का शुल्क वसूलने के लिए वाणिज्य विभाग के कर्मचारी यानी टीटीई रेलवे स्टेशन पर टिकट बनाने का काम धड़ल्ले से कर रहे हैं, फिर चाहे इस दौरान उन्हें यात्रियों के मान-सम्मान को धूमिल ही क्यों न करना पड़ जाए लेकिन ये टीटीई यात्रियों को कोच में चढ़ाने और दरवाजे खुलवाने के लिए जरा भी प्रयासरत नजर नहीं आते।
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बिगड़ रहे हालात, ऑफिस में बैठे अधिकारी
त्योहारों पर यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बेशक स्पेशल ट्रेनों का संचालन रेलवे ने कर दिया है। लेकिन इन ट्रेनों में व्यवस्थाएं बनाने वाले अधिकारी एसी कमरे में बैठे हैं और यात्री स्टेशन पर एक दूसरे से उलझ रहे हैं। पिछले दिनों रेलवे ने निर्देश दिए थे कि कोई भी जनरल श्रेणी का टिकट यात्री आरक्षित कोच में नहीं चढ़ेगा, लेकिन त्योहारों के दिनों में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह आदेश हवा-हवाई हो चुके हैं और पूर्व की तरह टीटीई प्लेटफार्मों पर टिकट बनाने का कार्य धड़ल्ले से कर रहे हैं और उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है।
बेबस यात्री
तीन माह पहले आरक्षित टिकट के सहारे घर पहुंचने की योजना बनाकर अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचे यात्रियों की हिम्मत उस समय जवाब दे जाती है, जब वो काफी जद्दोजहद के बाद भी कोच में नहीं चढ़ पाते और खिड़की से देखते हैं कि जिस सीट की बुकिंग उन्होंने तीन माह पहले करवाई थी, उस पर अनारक्षित टिकट के यात्री बैठे हैं, लेकिन उनसे पूछताछ करने वाला और उन्हें सीट से उठाने वाले जिम्मेदारी कर्मचारी कहीं खो गए हैं।
वंदे भारत का समय
देश में वंदे भारत ट्रेनों का संचालन बेशक हो गया है, लेकिन आज भी जनरल श्रेणी के यात्रियों को जो सुविधाएं मिली चाहिए, वो नहीं मिल पाई हैं, हालांकि रेलवे ने पिछले दिनों काफी गुणगान किया था कि मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में जनरल कोच की संख्या में वृद्धि की जाएगी, लेकिन अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों में ऐसे हालात देखने को नहीं मिल रहे। आज भी अधिकांश ट्रेनों में दो या चार कोच ही जनरल के लगे हैं, जबकि इनकी संख्या दोगुनी करने का दावा किया था।
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अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के काउंटर से जनरल टिकट ली थी लेकिन जब जनसेवा एक्सप्रेस आई तो वो ट्रेन में सवार ही नहीं हो पाए क्योंकि भीड़ को देखकर उनकी हिम्मत ही जवाब दे गई।
अनिल कुमार, यात्री।
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मुरदाबाद जाना था, लेकिन जनसेवा के हालात देखकर हिम्मत नहीं हुई कि ट्रेन में सवार हो जाऊं, अब बस से ही सफर करुंगा।
भीखम, यात्री।
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त्योहार को लेकर घर जाने की योजना बनाई थी। रविवार को अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचा तो जनेसवा एक्सप्रेस के हालात देखकर ट्रेन में चढ़ने की हिम्मत नहीं हो पाई।
अरुण, यात्री।
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सुबह अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया था। चार घंटे इंतजार करने के बाद दोपहर लगभग 12.30 बजे ट्रेन आई, लेकिन दरवाजे बंद होने के कारण वो ट्रेन में सवार नहीं हो सका।
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सुनील, यात्री।
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