माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। औद्योगिक क्षेत्र की 130 इकाइयों में 17 दिन से उत्पादन ठप है और आने वाले 20 से 25 दिनों तक उत्पादन शुरू होने के आसार भी नहीं लग रहे हैं। हालात यह हैं कि फैक्टरियों में जलभराव से खराब हुआ सामान परिसर में बिखरा पड़ा है। मशीनों को साफ किया जा रहा है। मशीनें भी पूरी तरह से सूख नहीं पाई हैं। वहीं दूसरी तरफ मुआवजे काे लेकर संकट बरकरार है। औद्योगिक क्षेत्र की विभिन्न एसोसिएशनों ने सरकार के नुमाइंदों के माध्यम से अपनी पीड़ा पहुंचाई है पर अभी तक संचालकों के लिए सरकार की तरफ से कोई राहत की खबर नहीं है। यहां तक कि अंबाला को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र भी घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में कारोबारियों को चिंता सता रही है कि कहीं ऐसा न हो कि वह सरकार के मुआवजे से भी जाएं और बीमा भी न मिले। क्योंकि कई बीमा कंपनियां बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र घोषित होने पर ही नुकसान की भरपाई करती हैं।
ऑर्डर हुए रद, मानसिक पीड़ा अलग से झेल रहे
औद्योगिक क्षेत्र में स्थित दि लेबोरेटरी प्रयोगशाला में प्रयोग होने वाले ग्लासवेयर उत्पाद बनाए जा रहे हैं। संचालक राकेश बताते हैं कि जलभराव में हमारी फैक्टरी में पांच फीट से अधिक पानी थी। सात दिन बाद पानी निकला तो हालात काफी खराब दिखे। पहले फैक्टरी परिसर को साफ किया गया। इसके बाद मशीनों को साफ किया गया। मशीनाें को चलाकर देखा तो वह नहीं चलीं। अब अगर किसी बड़े शहर से मैकेनिक को बुलाते हैं तो वह बहुत खर्चा मांगते हैं। ऐसे में आगरा और स्थानीय स्तर पर मैकेनिक खोज रहे हैं। कर्मचारियों के साथ खुद लगकर बताना पड़ रहा है कि कौन सा सामान कैसे साफ करना है कैसे रखना है। ग्लासवेयर उत्पाद को हम साफ तो कर लेंगे पर उसकी चमक चली गई है, ऐसे में इसे फेंकना ही पड़ेगा। उनकी इकाई द्वारा तैयार उत्पाद को वह देश में भेजने के साथ-साथ बाहर भी निर्यात करते हैं। हमारे आर्डर रद्द हो गए हैं। यह हाल देखकर मानसिक रूप से काफी पीड़ा ह रही है। हमारी लिफ्ट भी खराब हो गई है। इसमें दोबारा से वायरिंग करानी होगी।
फाइलें हुईं खराब, सामान भी बिखरा पड़ा
औद्योगिक क्षेत्र में स्थित रे इंटरप्राइजेज के संचालक ने राजेश चौधरी बताया कि वह भारतीय सेना और नेवी के लिए उत्पाद तैयार करते हैं। उन्होंने ढाई करोड़ रुपये से लेबोरेटरी तैयार की थी, उसमें शॉक टेस्टिंग मशीन सहित अन्य मशीनें थी। इस लैब में पानी चला गया जो खराब हो गईं। इसी प्रकार सीएमसी मशीन भी खराब हुई है, जो एक करोड़ रुपये से अधिक की आती है। यह भी खराब हो गई है। ठीक करने के लिए मैकेनिक को बुलाया है। फैक्टरी ऑफिस में रखीं फाइलें भी पानी में डूबने से खराब हो गईं। पूरा डाटा बर्बाद हो गया। इसके साथ ही ऑर्डर भी रुके पड़े हैं।
हमने सरकार को मांगपत्र भी दे दिया है पर अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। यहां तक कि बिजली के फिक्स चार्ज को लेकर रियायत देने को कहा था वह भी निर्णय नहीं हुआ है। अगर नहीं सुनी गई तो दोबारा से सरकार की चौखट पर जाएंगे ।
-डॉ अशावंत, चेयरमैन, हरियाणा चेम्बर ऑफ कामर्स अंबाला
मशीन को खोलकर सुखाते हुए। संवाद- फोटो : ट्रायल्स के दौरान प्रतिभाग करते खिलाड़ी-स्रोत खेल विभाग
मशीन को खोलकर सुखाते हुए। संवाद- फोटो : ट्रायल्स के दौरान प्रतिभाग करते खिलाड़ी-स्रोत खेल विभाग
मशीन को खोलकर सुखाते हुए। संवाद- फोटो : ट्रायल्स के दौरान प्रतिभाग करते खिलाड़ी-स्रोत खेल विभाग
मशीन को खोलकर सुखाते हुए। संवाद- फोटो : ट्रायल्स के दौरान प्रतिभाग करते खिलाड़ी-स्रोत खेल विभाग
मशीन को खोलकर सुखाते हुए। संवाद- फोटो : ट्रायल्स के दौरान प्रतिभाग करते खिलाड़ी-स्रोत खेल विभाग