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-सौदागर बाजार में हुई आगजनी की घटना ने प्रशासन के समक्ष खड़ी की बड़ी चुनौती

Tue, 18 Oct 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
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अंबाला कैंट/सिटी। त्यौहारी सीजन चल रहा है, त्यौहारों की रौनकें बाजारों में दिखने लगी है। लोगों की भीड़ का जबरदस्त रैला बाजारों में उमड़ रहा है। लेकिन इस माहौल में रविवार देरशाम कैंट के पॉश बाजार में ऐसी आगजनी की घटना हो गई, जिसने इस फेस्टिवल सीजन में एक बड़े खतरे की आशंका का इशारा कर दिया है।
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आगजनी के इन खतरों से निपटने के लिए भले ही फायर बिग्रेड की व्यवस्था हो, लेकिन बाजारों के मौजूदा हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि  यदि फिर से बाजारों में ऐसे जबरदस्त रश के बीच हादसा हुआ, तो प्रशासन की यह व्यवस्था धरी की धरी रह जाएगी। इतनी देर हो जाएगा कि या तो सब खाक हो जाएगा या ज्यादा नुकसान हो जाएगा।
क्योंकि इस वक्त कैंट और सिटी के तमाम बाजार जबरदस्त अतिक्रमण और बेतरतबी पार्किंग से अटे पड़े हैं। जिसकी ओर प्रशासन का  कोई ध्यान नहीं हैं।

ट्विनसिटी के इन बाजारों में सबसे ज्यादा खतरा

सिटी और कैंट दोनों ही  शहरों में आगजनी को लेकर वैसे तो सभी बाजार संवेदनशील हैं। लेकिन कुछ बाजार ऐसे हैं, जिन्हे खतरा सबसे ज्यादा है। क्योंकि ये बाजार पहले ही गलियों में बसे हैं, ऊपर से इन बाजारों में अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग के हालात ऐसे हैं कि यदि यहां आगजनी होती है, तो फायर बिग्रेड की गाडिय़ों का यहां पहुंचना मुश्किल है।
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इन बाजारों में अंबाला कैंट का पंसारी बाजार, सदर बाजार, न्यू सदर बाजार, चौड़ा बाजार, दुपट्टे वाला बाजार, बजाजा बाजार, कपड़ा बाजार, हनुमान मार्केट, कबाड़ी बाजार, निकलसन रोड मार्केट, दाल बाजार, अनाज मंडी मार्केट, सौदागर बाजार शामिल हैं। जबकि सिटी में पटेल रोड मार्केट, जैन बाजार, दाल बाजार, स्पाटू रोड मार्केट, सर्कुलर रोड मार्केट, पुरानी अनाज मंडी मार्केट, राधाकृष्ण बाजार, रेलवे रोड मार्केट, सराफा बाजार, जैन बाजार, हलवाई बाजार, पिपली बाजार, मीना बाजार, बस्तीराम बाजार, बांसा वाला बाजार, शुकलकुंड मार्केट, दशमेश मार्केट, लक्ष्मी मार्केट, कपड़ा मार्केट, छोटा बाजार शामिल है।

इस वजह से है बाजारों में बड़ा खतरा

दरअसल ट्विनसिटी के ये बाजार त्यौहारी सीजन हो या न हो, वैसे भी गुलजार रहते हैं। लेकिन चूंकि फेस्टिवल सीजन चल रहा है, तो इन बाजारों में इस वक्त पैदल चलना भी दूभर है। क्योंकि इन बाजारों में दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बावजूद पांच से पंद्रह फीट आगे तक सड़कों पर अतिक्रमण कर लिया है। यहां उन्होंने या तो खुद ही अस्थायी स्टाल खोल लिए हैं या अपनी दुकानों के आगे दिहाड़ी के हिसाब से अवैध रूप से स्टॉल किराए पर दे दिए हैं। दोनों ओर पांच से पंद्रह फीट  के इन अतिक्रमण से चौड़े बाजार भी संकीण हो गए हैं। ऊपर से वाहन चालक बाजार में कारें व दोपहिया वाहन लाते हैं। रश की वजह कुछ नहीं सूझता तो जहां मन किया वहीं चौपहिया व व दोपहिया वाहन खड़ा कर खरीददारी को निकल जाते हैं। इसी वजह से यहां हर बीस से पच्चीस मिनट में जाम जैसी स्थिति बन रही है। अब ऐेसे में इन बाजारों में यदि आग लग जाए, तो फायर बिग्रेड समय पर कैसे पहुंच पाएगी?

बाजारों में ही ज्वलनशील पदार्र्थों के भी गोदाम

इससे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इन बाजारों में दुकानदारों ने अवैध रूप से ज्वलनशील पदार्थों के गोदाम भी बना रखे हैं। यहीं बाजारों और रिहायशी इलाकों में दुकानदारों ने पटाखों के गोदाम खोल रखे हैं। जबकि सौंदर्य प्रसाधानों, कपड़ों व अन्य सामानों के गोदाम भी ऐसी गलियों में बनी दुकानों व पुराने किराए पर लिए मकानों में हैं, कि यदि यहां आगजनी हुई तो खतरा बहुत ज्यादा हो जाएगा।

पुलिस भी बेबस, चलता नहीं जोर

इस वक्त बाजारों में पार्किंग की समस्या भी गंभीर है, यही समस्या बाजारों को हर बीस से पच्चीस मिनट बाद जाम की जद में रखती है। जिन बाजारों में डिवाइडर बने हैं, उनके दोनों ओर ही लोगों ने  पाकंग बना ली है। लोग आराम से कारें, दोपहिया वाहन लगाकर घंटों गायब हो जाते हैं। कई बार समाज सेवियों ने इसकी शिकायत पुलिस से  भी की थी। लेकिन शायद इस बेतरतीब पार्किंग के आगे पुलिस भी बेबस हो चुकी है। अवैध पार्किंग करने वालों पर पुलिस का कोई जोर नहीं चलता, इसलिए बाजारों में हालात बद से बदत्तर होते जा रहे हैं।
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-एक्सपर्ट व्यू-

बेहतरी के लिए सख्ती जरूरी

मेरा मानना है कि यदि लोगों को सुविधा देनी है और वे भी बेहतर ढंग से तो नासूर बनती जा रही समस्याओं के प्रति अपना रूख थोड़ा सख्त करना पड़ेगा। सिटी हो या कैंट दोनों ही बाजारों में अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग की समस्या बहुत ज्यादा नासूर बन चुकी है। लेकिन त्यौहारी सीजन में ये समस्याएं आगजनी की घटनाओं के दौरान होने वाले राहत कार्यों में बड़ी बाधा भी बन सकते हैं। इसलिए पुलिस को इस पर सख्ती करनी होगी। ताकि कोई आगजनी होती है, तो कम से कम फायर बिग्रेड की गाडिय़ां समय पर घटना स्थल तक तो पहुंच सके। यदि इसी तरह हर थोड़ी देर बार जाम लग रहा है, तो लोग वैसे ही परेशान और ऐसे राहत कार्य तो लेट होंगे ही। पुलिस और प्रशासन को थोड़ा सख्त होना होगा। दूसरा, पटाखों व अन्य ज्वलनशील पदार्थों के गोदाम भी आबादी से दूर ही हों, तो बेहतर।
-बहादुर चंद, समाज सेवी एवं प्राचार्य, बीडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल-
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निगम पूरी तरह गंभीर, देंगे जरूर हल

त्यौहारी सीजन में आगजनी जैसी घटनाओं और आशंकाओं से निपटने को एमसीए पूरी तरह से तैयार है। हम इसका हल जरूर देंगे। बाजारों में अवैध अतिक्रमण के चालान काटने और सामान जब्त करने का अभियान जल्द शुरू होने वाला है। टीमों को गठित किया जा रहा है, ये टीमें त्यौहारी सीजन में सड़कों पर अतिक्रमण करने वालों के चालान करेगी। दूसरा पार्किंग के हालात सुधारने के लिए पुलिस से भी आग्रह किया जाएगा। क्योंकि जाम नहीं लगेंगें, तभी आगजनी जैसी घटनाओं के दौरान फायर बिग्रेड की गाडिय़ां तुरंत बाजारों तक पहुंच सकती है। दूसरा, मेरा जनता से आग्रह है कि यदि कोई भी पटाखे की दुकान या गोदाम रिहायशी इलाके में हैं, तो उसकी सूचना तुरंत उनके कार्यालय में दें। नाम गोपनीय रहेगा, लेकिन कार्रवाई पक्की होगी। क्योंकि पटाखों के गोदाम व दुकानें आगजनी का बड़ा कारण बन जाती हैं।
-दिनेश कुमार यादव, कमिश्नर, म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला-
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कैंट के सौदागार बाजार में उस शोरूम का दौरा किया गया है, जहां आगजनी हुई थी। दुकानदार को हर संभव मदद दिलवाने का आश्वासन दिया गया है। बाजारों में आगजनी का खतरा जरूर है, क्योंकि ऐसी घटना होती है, तो जाम व अतिक्रमण फायर बिग्रेड सुविधा को घटना स्थल तक पहुंचने में जरूर बाधा बनेंगे। इसके लिए कमिश्नर से बातचीत की जाएगी कि फेस्टिवल सीजन में बाजारों में जाम जैसे हालात पैदा न हो, अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ भी सख्ती बरती जाएगी।
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-रमेश लाल मल, मेयर व सुधीर जयसवाल डिप्टी मेयर, एमसीए-
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