बहुचर्चित एग्रोफेड घोटाले में अंबाला की सेशन कोर्ट ने दोषियों की याचिका को खारिज कर दिया है। दोषियों को पहले निचली अदालत से सजा हो चुकी है। लेकिन अब उन्होंने सेशन जज के समक्ष अपनी सजा माफ करने याचिका लगाई थी, लेकिन अंबाला सैशन जज ने इस याचिका को खारिज करते हुए उनकी सजा बरकरार रखने के आदेश दिए हैं।इस दौरान कोर्ट ने तर्क दिया कि चूंकि दोषियों पर पहले ही कई मामले दर्ज है, इसलिए उनकी सजा माफ नहीं की जा सकती। फिलहाल अधिकतर आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। उल्लेखनीय है कि निचली अदालत से दोषियों को तीन-तीन साल की सजा हो चुकी है। इस मामले में शौकत भट्टी, प्रकाश, गुरमुख सिंह, नवनीत सिंह, परविंद्र सिंह, सुशील मसीह, सरफीन व अनिल आरोपी है।
इस तरह से खेला था खेलअधिवक्ता एवं डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अर्टानी आरएस नरवाल ने बताया कि वर्ष 2005 में अंबाला में एग्रोफेड के नाम से एक फर्म बनाई गई थी। इस एग्रोफेड फर्म के नाम से बहुत से लोगों से नौकरियां पाने के लिए विभिन्न माध्यमों से आवेदन मंगवाए गए। इस दौरान काफी संख्या में नौकरियों के लिए आवेदन आए। आवेदन आने के बाद फर्म के सदस्यों ने विभिन्न एजेंटों के माध्यम से आवेदन करने वाले लोगों से नौकरी दिलवाने की एवज में लाखों रुपये ऐंठनें की प्लानिंग बनाई।इस दौरान आवेदन करने वाले युवकों को एजेंटों के माध्यम से विभिन्न प्राइवेट एग्रो कंपनियों में नौकरियां दिलवाने संबंधी नियुक्तियां पत्र भी सौंप दिया गया और इन नियुक्ति पत्र सौंपने की एवज में उसने दो से चार लाख रुपये तक ऐंठे गए। ये खेल जमकर चला, मगर जब युवक नियुक्ति पत्र लेकर संबंधित एग्रो कंपनियों में पहुंचे, तो संबंधित कंपनियों का वजूद ही नहीं था। ये देखकर बेरोजगार युवक हैरान रह गए। उसके बाद धीरे-धीरे एग्रोफेड फर्म के सदस्य भी धीरे-धीरे अंडरग्राउंड हो गए। लेकिन वर्ष 2006 में बेरोजगार युवकों ने फर्म के सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किए और अब तक आरोपियों पर करीबन बीस केस दर्ज है। निचली अदालत से आरोपियों को पहले ही तीन साल की सजा हो चुकी है। अब उन्होंने सैशन कोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन वो भी कोर्ट ने खारिज कर दी है। क्योंकि पहले ही दोषियों पर कई मामले चल रहे हैं, इसलिए कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।