फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहले भी कबूतरबाजी में फंस चुके लबाना, अब भाई छिंदा के साथ आया नाम

विज्ञापन
विज्ञापन
जिला परिषद सदस्य मक्खन सिंह लबाना व उनके भाई सुरिंद्र सिंह छिंदा का नाम पहले भी कबूतरबाजी में आ चुका है। तब जनसूई के एक परिवार ने दोनों भाईयों पर गैरकानूनी ढंग से उनके बेटे को अमेरिका भेजने का आरोप लगाया था। परिवार का आरोप था कि वह न तो अमेरिका पहुंचे न ही वापस भारत लौटा। मामले में पुलिस ने दोनों भाईयों के खिलाफ केस दर्ज कर सुरिंद्र छिंदा को गिरफ्तार किया था। जबकि पर्याप्त सबूत न होने की वजह से मक्खन सिंह को रिहा कर दिया था।
विज्ञापन

ताजे मामले ने एक बार फिर मक्खन सिंह लबाना के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। इससे उनके सियासी कैरियर को भी बड़ा झटका लगा है। बता दें कि 28 मार्च 2019 को लबाना ने इनेलों का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। तत्कालीन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने भाजपा विधायक असीम गोयल के कहने पर उन्हें पार्टी ज्वाइन करवाई थी। हालांकि लबाना ने सफाई में कहा है कि छिंदा फौजी उसका भाई नहीं है और वही मुख्य एजेंट है। उसने खुद को बचाने के लिए मेरा नाम लिखवा दिया है।
गैरकानूनी तरीके से भेज रहे विदेश
इस बार डिफेंस कॉलोनी वासी बलविन्द्र सिंह ने मक्खन सिंह लबाना व उसके भाई सुरिंद्र सिंह छिंदा पर उसके भतीजे यशप्रीत सिंह को गैरकानूनी तरीके से अमेरिका भेजने का आरोप लगाया है। उसने बताया कि अमेरिका ने उसके भतीजे को डिपोर्ट कर वापस भेज दिया है। यशप्रीत को उसके दोस्त रवि ने ही मक्खन व छिंदा के बारे में जानकारी दी थी। बातचीत के बाद 16 लाख रुपये में अमेरिका भेजने की बात तय हुई थी। अमेरिका जाने के लिए उसने भतीजे से आरोपियों ने गैरकानूनी तरीके से कई देशों की सीमाएं पार करवाई थी। यशप्रीत को अमेरिका भेजने के लिए पहले इक्वाडोर की फ्लाइट में बैठाया गया। जहां वह विक्टो स्टेट में उतरा था। फिर एजेंट के जरिए उसे टैक्सी में बैठाकर कोलंबिया भेजा गया था। फिर उसे एक आदमी बस द्वारा टरबो सिटी ले गया।
विज्ञापन

कोलंबिया से 11 लड़के भेजे थे कपूरगणा
यहां उसे 11 लड़के और मिले थे जोकि हरियाणा व पंजाब के थे। इसके बाद नाव में बैठाकर कपूरगणा सिटी में ले गया। तब सभी को जंगल में छोड़ दिया गया। जंगल के रास्ते पैदल चलकर सभी पांच दिन में सेना कैंप में पहुंचे। एक महीने तक वह सेना कैंप में रहे। इसके बाद उन्हें कोस्टरकि देश के इमीग्रेशन अधिकारियों को सौंप दिया गया। यहां उन्हें 30 दिन का कंट्री पास मिला था। बाद में बस में बैठाकर उन्हें निकारागुवा बॉर्डर पर भेज दिया गया। फिर उन्हें हुंडारास देश की सीमा पर छोड़ा गया। फिर उन्हें ग्वाटेमाला देश ले जाया गया। इसके बाद वह टैक्सी के जरिए मैक्सिको पहुंचे जहां छह दिन जेल में रहे।
अमेरिका में एंट्री से पहले लिए 6 लाख
बलविंद्र का आरोप है कि अमेरिका में एंट्री से पहले मक्खन व उसके भाई ने बचे छह लाख रूपये भी उनसे ले लिए थे। हालांकि कैलीफोर्निया में एंट्री के तुरंत बाद उन्हें पकड़ लिया गया। कुछ दिन जेल में रखने के बाद फिर उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया।
पहले विधायक का चुनाव लड़ा फिर जिप चेयरमैन के उम्मीदवार बने
जिला परिषद सदस्य मक्खन सिंह लबाना अंबाला की राजनीति में बड़ा नाम है। मक्खन सिंह ने अपने सियासी कैरियर का आगाज बसपा से किया था। बसपा ने 2009 में उन्हें अंबाला सिटी विधानसभा सीट से पूर्व मंत्री विनोद शर्मा के खिलाफ मैदान में उतारा था। चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर वह सुर्खियों में आए थे। इसके बाद उन्होंने इनेलो का दामन थाम लिया। तब वह इनेलो की टिकट पर जिला परिषद का चुनाव लड़कर रिकार्ड मतों से जीते थे। इसी वजह से इनेलो ने उन्हें जिला परिषद चेयरमैन पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन चुनाव में दो वोट क्रॉस होने की वजह से लबाना चेयरमैन नहीं बन पाए। हालांकि इनेलो के बिखराव के बाद मक्खन ने लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थाम लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें