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निर्धारित स्थान को अस्थाई बता जिला बार को बिजली कनेक्शन से इंकार पर एसई को नोटिस जारी

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कोर्ट परिसर में नवनिर्मित एडवोकेट लिटिगेंट में जिला बार एसोसिएशन को स्थाई कनेक्शन न देने के मामले में बिजली निगम ने अंबाला सर्कल के एसई को नोटिस जारी किया है। सोमवार को मामले में एसडीओ द्वारा कोताही बरतने के चलते एसई अंबाला को यह नोटिस कोर्ट ने जारी किया। मामले में आज सुनवाई की तारीख लगी थी लेकिन बिजली निगम की ओर से कोर्ट में कोई भी पेश नहीं हुआ। लिहाजा कोर्ट ने कहा कि बिजली निगम मामले को लेकर कतई गंभीर नहीं है। इसीलिए अब सीधे ही कोर्ट ने एसई बिजली निगम को नोटिस जारी कर 27 नवंबर को जवाब मांगा है।
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ये है पूरा विवाद
दरअसल सांसद रतन लाल कटारिया और विधायक असीम गोयल ने 2 मार्च 2019 को कोर्ट परिसर में एडवोकेट लिटिगेंट का शुभारंभ किया था। तत्कालीन जिला बार के प्रधान उमरीश गांधी के प्रयासों से विधायक असीम गोयल ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिलवाई थी। करीब 15 लाख रुपयेे के इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 60-65 वकील बैठते हैं और लिटिगेंट (विवादी) के बैठने की यहां व्यवस्था हो सकी। लेकिन बिजली व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां पर बैठने वाले वकीलों ने पैसे इकट्ठा कर बिजली निगम में बार एसोसिएशन अंबाला के नाम से नया कनेक्शन अप्लाई कर दिया। इसकी एवज में औपचारिकताएं पूरी करते हुए 9400 रुपये बिजली निगम में जमा करवा दिए। परंतु बिजली निगम ने बार को बिजली का नया कनेक्शन देने से इंकार कर दिया। कहा कि यह अस्थाई स्थान है। इस पर स्थाई कनेक्शन नहीं दिया जा सकता। यदि लेना है तो अस्थाई कनेक्शन के लिए आवेदन करें। इसी मामले को लेकर जिला बार एसो. के सदस्यों ने 14 अक्टूबर को यूटीलिटी कोर्ट में केस दायर किया। मामले में पहली बार 24 अक्टूबर को एसडीओ तलब हुए। इसमें एसडीओ से जवाब मांगा गया। एसडीओ ने मौखिक तौर पर कहा कि यहां कनेक्शन नहीं दिया जा सकता क्योंकि यह अस्थाई ठिकाना है। कोर्ट ने लिखित जवाब 31 अक्टूबर तक मांगा। लेकिन 31 को एसडीओ ने जवाब के लिए समय मांगा। कोर्ट ने 20 नवंबर तारीख लगा दी। 20 को एसडीओ से एक लेटर दिखाया जिसमें अस्थाई कनेक्शन को परिभाषित किया गया था। उसमें लिखा था कि अस्थाई कनेक्शन लकड़ी के खोखे, लकड़ी के बूथ और लकड़ी स्टॉल हो सकते हैं। लेकिन यह कहीं नहीं लिखा था कि इस तरह के शेड को अस्थाई कहा जाएगा, जैसा बार एसो. के लिए बनाया गया है। लिहाजा 20 को भी एसडीओ ने लिखित में कुछ जवाब नहीं दिया। चौथी सुनवाई 21 नवंबर को लगी। इसमें एसडीओ अपनी पिछली बात से मुकर गए बोले कि बार एसो. इस जगह की रजिस्ट्री दिखाए कि यह जमीन उनकी है। इस पर याचिका कर्ताओं ने कहा कि यह कनेक्शन ही नहीं देना चाहते। इसीलिए इधर-उधर की बात कर कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। कोर्ट ने मामले में 25 नवंबर की तारीख लगाई थी।
सोमवार को यह हुआ यूटीलिटी कोर्ट में
सोमवार को यूटीलिटी कोर्ट में एसडीओ नहीं पहुंचे। न ही उन्होंने अपना कोई प्रतिनिधि भेजा। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बिजली निगम मामले को लेकर गंभीर नहीं है। इसीलिए कोर्ट ने 27 नवंबर की तारीख लगाते हुए एसई अंबाला को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांग लिया।
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हाईकोर्ट बिल्डिंग कमेटी की अनुमति से ही बनता है स्ट्रक्चर
जिला बार एसोसिएशन ने यूटीलिटी कोर्ट में बताया कि जिस जगह बिजली निगम अस्थाई ठिकाना बता रहा है वह हाईकोर्ट द्वारा गठित बिल्डिंग कमेटी की अनुमति से बनती है। इसके बाद हरियाणा सरकार को आर्डर जाते हैं। फिर हरियाणा सरकार संबंधित विभाग को स्ट्रक्चर तैयार करने की जिम्मेदारी देती है जोकि अंबाला में पीडब्ल्यूडी को दिया गया था। इस तरह इस स्ट्रक्चर को अस्थाई नहीं कहा जा सकता।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यूटीलिटी कोर्ट से क्यों नोटिस जारी किया गया है।
आरके खन्ना, एसई अंबाला।
हम कनेक्शन देने से इंकार नहीं कर रहे। हम तो स्थाई कनेक्शन नहीं दिया जा सकता यह कह रहे हैं क्योंकि वह अस्थाई ठिकाना है। कोर्ट में एसडीओ क्यों नहीं गए यह पूछताछ के बाद ही कहा जा सकता है।
पुनीत कुमार, एक्सईएन सिटी।
पहली बात तो यह हैं कि जिसे बिजली निगम अस्थाई बता रहा है वह गवर्नमेंट ग्रांट से बना है। उसके लिए डीसी से अनुमति ली गई है। एमएलए असीम गोयल की ग्रांट से यह पीडब्ल्यूडी ने बनवाया। ऐसे में समझ से बाहर है कि बिजली निगम क्यों हमें कनेक्शन देने से इंकार कर रहा है।
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उमरीश गांधी, पूर्व प्रधान जिला बार एसो.
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