संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। स्वच्छता सर्वेक्षण में गिरी नगर निगम की रैंकिंग ने निदेशालय के अधिकारियों को भी चौंका दिया है। निदेशालय ने भी नगर निगम अधिकारियों से रैंकिंग गिरने पर रिपोर्ट मांग ली है। अहम बात यह भी है कि नगर निगम की ओर से पोर्टल पर घर-घर से कूड़ा एकत्रित (अपशिष्ट संग्रहण) की जानकारी 100 प्रतिशत डाली गई है, जबकि स्वच्छता सर्वेक्षण में 65 प्रतिशत ही यह कार्य किया जाना पाया गया है। ऐसा अंबाला में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों ने घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने का आंकड़ा 100 प्रतिशत भरा है। अब निदेशालय ने इसको लेकर रिपोर्ट मांगी है। निदेशालय की ओर से यह देखा जा रहा है कि यह गलती से पोर्टल पर आंकड़ा चढ़ा है या आंकड़ों में हेर-फेर की गई है।
निगम अधिकारियों से मांगी सात दिन में रिपोर्ट
निदेशालय की ओर से पत्र में कहा गया है कि जिन एजेंसियों को घर-घर जाकर कचरा संग्रहण और परिवहन के लिए नियुक्त किया गया है, उन पर खराब प्रदर्शन और गलत जानकारी देने के लिए जुर्माना लगाया जाना चाहिए। ऐसे शहरी स्थानीय निकायों के संबंधित एसबीएम नोडल अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए। इसकी रिपोर्ट डीएमसी, सीएमसी से सात दिनों के भीतर मुख्यालय ने मांगी है। जिसमें स्पष्ट रूप से तथ्य बताए जाएंगे और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध प्रासंगिक सेवा नियमों के तहत आरोप-पत्र जारी करने की सिफारिश की जाएगी।
पोर्टल पर 100 प्रतिशत की सूचना दी, सत्यापित प्रदर्शन में काफी कम
अधिकांश यूएलबी ने एसबीएम पोर्टल पर 100 प्रतिशत घर-घर जाकर कचरा संग्रहण की सूचना दी है, जबकि स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 के दौरान तीसरे पक्ष के मूल्यांकन के अनुसार सत्यापित प्रदर्शन काफी कम है, कई यूएलबी ने 60 प्रतिशत से कम कवरेज दर्ज किया है, और कुछ ने 40 प्रतिशत से भी कम कवरेज दर्ज किया है। वहीं, निदेशालय ने पत्र में यह भी कहा है कि इस गलत रिपोर्ट के कारण राज्य की छवि धूमिल होती है। राष्ट्रीय मूल्यांकन में रैंकिंग कमजोर होती है और स्वच्छ भारत मिशन-2.0 (शहरी) के अंतर्गत वित्त पोषण और विश्वसनीयता को खतरा पहुंचता है।
निदेशालय की ओर से पत्र आया था। शहर से औसतन ही कूड़ा उठा है। पोर्टल पर 100 प्रतिशत की गलत एंट्री हो गई है। इसकी रिपोर्ट निदेशालय को भेज दी गई है। इस संबंध में किसी कर्मचारी को नोटिस जारी नहीं किया गया है।
- दीपक सूरा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, नगर निगम।
डंपिंग प्वाइंट से समय पर नहीं उठता कूड़ा, शहर की रैंकिंग गिरने में यह भी वजह
- शहर के सेक्टर-आठ, मॉडल टाउन में भी बिखरा रहा कूड़ा, कर्मचारी समय पर नहीं उठाते
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। नगर निगम की ओर से प्रति वर्ष 15 करोड़ से ज्यादा का बजट शहर के सफाई कार्य पर खर्च किया जा रहा है। इसके बाद भी नगर निगम लगातार देश और राज्य स्तर पर रैंकिंग में पिछड़ रहा है। राज्य स्तर पर पहले नगर निगम अंबाला शहर की 8वीं रैंकिंग आई थी। इस बार राज्य स्तर पर 17वीं रैंकिंग आई है। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर नगर निगम की 212वीं रैंकिंग आई है। यह रैंकिंग पहले 205 पर थी। अब यह रैंकिंग भी गिरकर नीचे चली गई है। इस रैंकिंग का सबसे बड़ा कारण शहर में सही तरीके से सफाई नहीं होना है।
सेक्टर-8 में गंदगी फैली रहती है। यहां शहीद उधम सिंह चौक के नजदीक सड़क पर ही कूड़ा बिखरा रहता है। गुरुवार को भी यहां कूड़ा बिखरा मिला। इसी तरह अंबाला क्लब के सामने डंपिंग प्वाइंट पर कभी समय पर कूड़ा नहीं उठता। यहां भी गंदगी का ढेर लगा मिला। कूड़े में बेसहारा गोवंश व आवारा कुत्ते घूम रहे थे। शहर सिविल अस्पताल के पास कूड़ा समय पर नहीं उठाया जा रहा। नगर निगम कार्यालय के पास ही नाहन हाउस रोड पर भी गंदगी फैली रहती है। इसी तरह पुलिस लाइन में राजकीय स्कूल के पास भी कूड़े का ढेर लगा मिला।
सफाई अभियान को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे अधिकारी
नगर निगम की गिरती सफाई व्यवस्था और स्वच्छता सर्वेक्षण में मिल रहे खराब अंक को लेकर नगर निगम की महापौर सैलजा संदीप सचदेवा भी बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिख चुकी हैं। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया कि निगम अधिकारी टेंडर प्रक्रिया के नाम पर काम में लापरवाही बरत रहे हैं और सफाई अभियान को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं। पिछले तीन वर्षों से अंबाला नगर निगम स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ता जा रहा है। स्वच्छता के हालात इतने खराब हो गए हैं कि जनता को जगह-जगह गंदगी और कूड़े के ढेरों का सामना करना पड़ रहा है।
शहर के सेक्टर-आठ में सड़क के पास फैली गंदगी। संवाद- फोटो : अवैध मेडिकल स्टोर बंद कराती टीम।