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8 लाख खर्च कर की थी महामारी से बचाव की तैयारी, 16 आईसोलेशन कोच में नहीं आया एक भी मरीज

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अंबाला। कोरोना मरीजों के उपचार के लिए लगभग 8 महीने पहले बनाए गए 16 कोच वॉशिंग लाइन में धूल फांक रहे हैं। लाखों रुपये की लागत से तैयार कोच का आजतक इस्तेमाल नहीं हो सका। रख-रखाव के अभाव में कोच में लगाया गया सामान कंडम होना तय है। अप्रैल माह में उत्तर रेलवे अंबाला मंडल की जगाधरी वर्कशॉप में सैंकड़ों की संख्या में आईसोलेशन कोच तैयार किए गए। प्रत्येक कोच को मॉडिफाई करने में और जरूरी उपकरण लगाने में लगभग 50 हजार प्रति कोच के हिसाब से खर्चा आया।
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आईसोलेशन कोच में दो होल्डर, दो कपड़े टांगने के हुक, ऑक्सीजन सिलिंडर ब्रेकेट, पैर वाले तीन कूड़ेदान, स्नानघर में व्यवस्था (स्टूल, मग, बाल्टी), हर कोच में एक नर्स और चिकित्सक के लिए अलग से कक्ष बनाया गया है। कोच में प्लास्टिक के चादर लगाए हैं। मेडिकल उपकरणों को चलाने के लिए पर्याप्त बिजली के स्विच व बीच की बर्थ को हटाया गया है। इस तरह पूरी आईसोलेशन ट्रेन को तैयार करने में लगभग 8 लाख रुपये खर्च हुए थे।
अस्पताल की तरह उपलब्ध करवाई गई थी मूलभूत सुविधाएं
कोच को अस्पताल की तरह ही इस्तेमाल करने के लिए मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। दस कोच को जोड़कर एक ट्रेन वॉशिंग लाइन में खड़ी कर दी गई। इसके नजदीक ही 6 अतिरिक्त कोच भी खड़े किए गए हैं। प्रत्येक कोच में 8 आईसोलेशन वार्ड यानी 9 बेड तैयार किए गए। प्रत्येक वार्ड में आपातकालीन स्थिति में एक मरीज को रखा जा सकता है। बोगियों को आईसोलेशन वार्ड में तब्दील करने के लिए शयनयान एवं सामान्य श्रेणी के कोच को परिवर्तित किया गया है। चूंकि इन कोचों का इस्तेमाल अभी तक मरीजों को भर्ती करने के लिए नहीं किया गया। इसलिए महामारी के बाद इनके वैकल्पिक प्रयोग पर विचार किया जा सकता है।
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दिशा-निर्देशों पर ही फैसला
आईसोलेशन कोच की साफ-सफाई के निर्देश दिए गए हैं। अगर ऐसा नहीं है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। यदि जरूरत पड़ेगी तो इन कोचों का इस्तेमाल किया जाएगा। कोचों को अन्य किसी प्रयोग में लेने के लिए अभी बोर्ड की तरफ से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
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-पंकज गुप्ता, नोडल अधिकारी कोरोना, अंबाला मंडल।
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