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अक्तूबर माह में थम गई कोरोना की रफ्तार, मौतों के आंकड़े बढ़े

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अंबाला। स्वास्थ्य विभाग के पूर्व के दावे सही साबित नहीं हुए। तापमान गिरने के साथ जिले में कोरोना बढ़ने की बजाए घट गया। आंकड़े इसके जीते-जागते गवाह हैं। इन आंकड़ों ने यह भी साबित कर दिया कि जिले में कोरोना के सैंपल कम नहीं हुए बल्कि वास्तव में ही कोरोना की स्पीड करीब 50 फीसदी गिरी है। खुद स्वास्थ्य विभाग इस बात से बेखबर है कि आखिर बिना वैक्सीन के यह आंकड़े कैसे घटते जा रहे हैं।
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बेशक अब रोजाना औसतन करीब 750 सैंपल जांचे जा रहे हैं जोकि पहले करीब 1150 होते थे लेकिन यदि इन सैंपल की एवरेज निकाली जाए तो साफ है कि प्रत्येक 100 सैंपल पर अब 6 लोग संक्रमित मिल रहे हैं जोकि सितंबर तक प्रत्येक 100 पर 12 मिलते थे।
घटते आंकड़ों के चलते लापरवाह हुई जनता, इसीलिए मौत ज्यादा
कोरोना के जैसे-जैसे आंकड़े घटे जिले में वैसे-वैसे लोग इसके प्रति बेफिक्र हो गए। यही कारण है कि हर 15वें दिन कोरोना से मौत की स्पीड बढ़ती गई। अंबाला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसके जीते-जागते गवाह हैं। क्योंकि लोगों ने कोरोना को हल्के में लेना शुरू कर दिया और उस वक्त अस्पताल में मरीज को लेकर पहुंचे जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
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खुद देखें किस तरह घटी कोरोना की स्पीड और बढ़ी मौत की रफ्तार
ये है 1 से 14 सितंबर तक की हेल्थ रिपोर्ट
सितंबर के 14 दिनों में जिले में 16532 सैंपल लिए गए यानि हर दिन 1180 सैंपल हुए। इनमें से कुल 2088 यानि 149 मरीज रोजाना संक्रमित मिले। 27 लोगों की कोरोना से मौत हुई। इस तरह कुल सैंपल में से 12.63 सैंपल संक्रमित मिल रहे थे। इनमें से मृत्यु दर 1.29 प्रतिशत रही।
सितंबर के तीसरे और चौथे सप्ताह की हेल्थ रिपोर्ट
15 से 30 सितंबर तक 14994 यानि हर दिन 937 सैंपल हुए। कुल 1712 यानि औसतन हर दिन 107 लोग संक्रमित मिले। मतलब 11.42 प्रतिशत सैंपल संक्रमित मिले। 29 लोगों की मौत हुई और डेथ रेट 1.69 प्रतिशत रहा।
अक्तूबर में यह रहा जिले का हेल्थ कार्ड
एक से 14 अक्तूबर तक कुल सैंपल 10 हजार 448 लिए गए यानि औसतन हर दिन 746 सैंपल हुए। कुल 636 लोग संक्रमित पाए गए यानि हर दिन 45 नए केस। इस अवधि में कुल सैंपल में से 6.09 प्रतिशत सैंपल कोरोना पॉजिटिव पाए गए। कुल 12 लोगों की जान गई। डेथ रेट 1.88 रहा।
पहले लोग ज्यादा जागरूक थे और कुछ भी लक्षण होने पर तुरंत जांच करवाने आ रहे थे लेकिन अब पिछले 15 दिनों से रोजाना एक ऐसा मरीज उस हालत में आता है जब उसका ऑक्सीजन लेवल बहुत कम होता है। इतना ही नहीं अब प्राइवेट अस्पताल या झोलाछाप मरीजों को भ्रमित करने लगे हैं कि कोरोना कुछ नहीं। इसी कारण आखिरी स्टेज में मरीज अस्पताल पहुंचता है। जहां तक कोरोना संक्रमितों की संख्या कम होने की बात है तो पूरा स्वास्थ्य विभाग इस पर शोध कर रहा है कि क्यों कोरोना के केस इस समय कम हो रहे हैं।
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-सुखप्रीत सिंह, नोडल कोविड अधिकारी।
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