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कैंटोनमेंट बोर्ड का सेना और रेलवे पर 96 करोड़ बकाया

Sun, 13 Oct 2013 11:37 PM IST
अंबाला
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अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड का करोड़ों रुपये सेना और रेलवे दबाकर बैठी है। ये रुपये सर्विस चार्ज मद के हैं। बकाए की मांग को लेकर कैंटोनमेंट बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित किया है।
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इसके तहत बकाए के लिए रक्षा मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी और रेलवे को लीगल नोटिस भेजा जाएगा। बोर्ड सदस्यों और अफसरों का कहना है कि सेना और रेलवे सर्विस चार्ज का समय पर भुगतान नहीं कर रहा ह्रै।

आर्मी कमांडर के समक्ष रखी मांग
कैंटोनमेंट बोर्ड के सदस्यों और अफसरों ने आर्मी कमांडर के समक्ष इस मांग को रखते हुए सेना से बकाया सर्विस चार्ज दिलवाने की मांग की है। सैन्य क्षेत्र डिफेंस इस्टेट कार्यालय की जमीन पर बसा हुआ है और कैंटोनमेंट बोर्ड यहां बसी सेना को विभिन्न तरह की सुविधाएं मुहैय्या करवाता है।
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डिफेंस इस्टेट कार्यालय और कैंटोनमेंट बोर्ड की असेसमेंट के बाद सर्विस चार्ज हर साल तय किए जाते हैं। अब वर्ष 2006 से लेकर आज तक 89 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज के सेना की साइड खड़े हो गए हैं, जो कैंटोनमेंट बोर्ड ने वसूलने हैं। मगर वर्ष 2006 के बाद से सेना ने ये सर्विस चार्ज कैंटोनमेंट बोर्ड को अदा ही नहीं किए।

रेलवे को भेजा लीगल नोटिस
सेना की तरह ही रेलवे ने भी कैंटोनमेंट बोर्ड के 7,23,67,662 करोड़ रुपये दबा रखे हैं। कैंटोनमेंट बोर्ड ने इसके लिए रेलवे को कई बार नोटिस भी भेजा है।

मगर रेलवे ने बोर्ड का बकाया नहीं चुका है। इसके चलते बोर्ड अफसरों व बोर्ड सदस्यों ने ये फैसला किया है कि रेलवे को लीगल नोटिस भेजा जाएगा। इसके बावजूद रेलवे ने कोई रिस्पांस नहीं दिया तो उसके खिलाफ कोर्ट में कार्रवाई की जाएगी। इसी के चलते फिलहाल रेलवे को लीगल नोटिस भेज भी दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि रेलवे स्टेशन परिसर कैंटोनमेंट बोर्ड एरिया के ही अंतर्गत है। इस लिहाज से रेलवे को भी हर साल बोर्ड को सर्विस चार्ज देने हैं। मगर कई सालों से रेलवे ऐसा नहीं करता।

अच्छी नहीं कैंटोनमेंट बोर्ड की हालत
कैंटोनमेंट बोर्ड की माली हालत इस वक्त ज्यादा अच्छी नहीं है। कैंटोनमेंट बोर्ड को जहां इस बार घाटे का बजट पेश करना पड़ा, वहीं अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड अब ‘एडिड बोर्ड’ की श्रेणी में आ गया है।

यानी अब बोर्ड को चलाने में मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस की एड की जरूरत पड़ेगी। पहले ये बोर्ड ‘सेल्फ डिपेंडेंट’ बोर्ड की श्रेणी में था। मगर अब करोड़ों रुपये बकाया फंसने की वजह से बोर्ड की माली हालत बिगड़ गई है।

बकाया मिले तो विकास बढ़े
कैंटोनमेंट बोर्ड के सदस्य और अफसर दोनों बोर्ड का फंसा बकाया सेना और रेलवे से निकलवाने के लिए प्रयासरत है। लॉ एंड एजूकेशन कमेटी की चेयरमैन सिम्मी साहनी व फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन राजकुमार कहते हैं कि बोर्ड आज खुद आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है।

इसलिए इस बार बजट भी ज्यादा संतोषजनक नहीं है। उनके अनुसार यदि सेना और रेलवे 96 करोड़ रुपये बकाया कैंटोनमेंट बोर्ड को दे देती, तो बोर्ड की माली हालत ठीक हो सकती है। साथ ही जो रुपये आएगा, उससे सैन्य क्षेत्र का विकास ही आगे बढ़ेगा और इसका लाभ सेना की यूनिटों और लोगों को ही होगा।

यदि कोई बकाया है तो रेलवे दे देगा। मगर इसके लिए पहले कैंटोनमेंट बोर्ड के अफसर मुझसे तो बात करें। मेरे से तो अभी तक किसी ने इस बारे में कोई बात ही नहीं की है। नोटिस तो दूर की बात है। ये मामला तो टेबल पर भी बैठकर निपटाया जा सकता है। यदि बकाया है तो रेलवे को देने में क्या आपत्ति हैं।
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-एके कठपाल, डीआरएम, अंबाला मंडल-

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