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Ambala News: अपराधियों का दुश्मन नहीं, पुलिस को आम नागरिकों का दोस्त समझें

Fri, 26 Sep 2025 04:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला

सार

अंबाला कैंट थाने में ‘दोस्त पुलिस’ कार्यक्रम के तहत एसडी कन्या स्कूल की 55 छात्राओं को पुलिस कार्यप्रणाली, आपातकालीन नंबर 112 और साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई। छात्राओं ने पुलिस अधिकारियों से कई सवाल पूछे और जागरूकता बढ़ाई।
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विस्तार
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संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। पुलिस को सिर्फ अपराधियों का दुश्मन नहीं, बल्कि आम नागरिकों का दोस्त समझे। इसी सोच के साथ अमर उजाला फाउंडेशन ने वीरवार को अंबाला कैंट थाना में ‘दोस्त पुलिस’ कार्यक्रम का आयोजन किया। दोस्त की भूमिका में मौजूद पुलिसकर्मियों ने एसडी कन्या स्कूल की 55 छात्राओं को पुलिस की भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस से डरने के बजाय संकट में आपातकालीन नंबर याद रखे और उस पर फोन करें।
अंबाला कैंट थाना के कार्यवाहक प्रभारी अनिल कुमार ने छात्राओं को थाने में आकर मुंशी कक्ष में जाकर शिकायत दर्ज करवाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अधिकारी नियुक्त किया जाता है। जो मामले की निष्पक्ष जांच करता है। जांच में दोषी पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इस दौरान छात्राओं को थाने का हवालात कक्ष भी दिखाया गया, जहां पर आरोपी को काबू कर कोर्ट में पेश करने से पहले रखा जाता है। इस मौके पर प्रिंसिपल दीपिका, शिक्षिका अनु शर्मा, मिनाक्षी व अन्य मौजूद रहे।
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छात्राओं ने पूछा कि पुलिस अंकल डायल-112 क्या है

दोस्त पुलिस कार्यक्रम में छात्राओं ने भी एक के बाद एक कई सवाल किए। पूछा कि पुलिस अंकल डायल-112 हमारे किस काम आती है। इस प्रश्न का जवाब देते हुए महिला एएसआई अनीता ने बताया कि अगर आपको कोई भी मुसीबत लगे तो आप तत्काल पुलिस की सहायता लेने के लिए 112 पर कॉल कर जानकारी दें। यह लोगों की सहायता के लिए ही बनी है। कार्यक्रम के दौरान ही डायल-112 की गाड़ी दिखाते हुए उनकी कार्यप्रणाली के बारे में अवगत करवाया गया कि एक फोन पर यह हाजिर हो जाती है।



प्रश्न : साइबर अपराध से कैसे बचें : छात्रा लवन्या
उत्तर : मोबाइल फोन, इंटरनेट और ऑनलाइन पेमेंट्स ने जहां लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, साइबर अपराधियों ने भी इन्हीं का सहारा लेकर ठगी का जाल बुन दिया है। किसी भी अनजान नंबर से आए फोन कॉल्स पर भरोसा न करें, कोई भी फेक लिंक या अज्ञात वीडियो न खोलें, यदि कोई संदिग्ध मैसेज आता है जिसमें पैसा बढ़ाने या ऑफर का लालच हो, तो उसे तुरंत डिलीट करें।
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प्रश्न : डिजिटल अरेस्ट क्या होता है : छात्रा तमन्ना
उत्तर - डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता है। यह एक साइबर अपराध है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम में फोन करने वाले कभी पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई और दिल्ली या मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर बात करते हैं। ऐसे स्कैम से सावधान रहें।
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