माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। जिला अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन के बाद होने वाली किसी भी चिकित्सकीय जटिलता को सीधे तौर पर डॉक्टर की लापरवाही नहीं माना जा सकता।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हितेश गर्ग की अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें हरियाणा सरकार और डॉक्टर को एक महिला को 4.30 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया गया था। अंबाला सिटी निवासी पूनम ने अप्रैल 2006 में अंबाला सिटी के सिविल अस्पताल में पित्त की थैली का ऑपरेशन करवाया था। यह सर्जरी डॉ. सुधीर कपूर ने की थी। महिला का आरोप था कि सर्जरी के दौरान लापरवाही बरती गई, जिससे उसे पेट में भयंकर दर्द और अन्य समस्याएं शुरू हो गईं।
इसके बाद उसे चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित मेडिकल कॉलेज और लुधियाना के डीएमसी जैसे अस्पतालों में लंबा इलाज कराना पड़ा। महिला ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए 4.30 लाख रुपये के मुआवजे का दावा ठोका था। मई 2018 में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार और डॉक्टर को हर्जाना राशि भुगतान करने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार ने अपील दायर की थी, वहीं महिला ने भी ब्याज के लिए एक अलग अपील लगाई थी।