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...और फरियादियों को मिल रही तारीख पर तारीख

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कोरोना की मार ने आम से लेकर खास तक को लाचार कर दिया है। वकील भी इससे अछूते नहीं हैं। 2020 में करीब 3 से 4 माह तक अदालतें बंद रहीं। वहीं, अब पिछले एक माह से कोर्ट में केवल जरूरी केस की ही सुनवाई हो रही है। ऐसे में इंसाफ की आस लगाए फरियादियों को पुराने मामलों में सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। जिला कोर्ट की बात करें तो यहां 15 से 16 अदालतों में 10 हजार से अधिक केस लंबित हैं, जिनकी सुनवाई चल रही है। अदालतों में कामकाज बाधित होने से वकीलों की आय का साधन भी ठप हो गया है।
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जरूरी केसों की ऑनलाइन हो रही सुनवाई
फिलहाल जरूरी केसों में ही वीडियो कॉल और व्हाट्सएप पर सुनवाई हो रही है। अन्य विवादों को दो से तीन माह में एक बार जिले भर में लोक अदालत लगाकर निपटाने का प्रयास किया जाता है, जबकि अधिकतर में अगली तारीख लगा दी जाती है।
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हाईकोर्ट की ओर से जो भी निर्देश आएं है। उसी के अनुसार कोर्ट में काम चल रहा है। इस समय केवल जरूरी केसों पर ही सुनवाई हो रही है। जरूरी केस के हिसाब से जज और वकील कोर्ट में पहुंच रहे हैं। आगे जो भी हाईकोर्ट की ओर से गाइडलाइन जारी की जाएगी उसी के हिसाब से काम करेंगे।
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- इकबाल सिंह, प्रधान, बार एसोसिएशन अंबाला।
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हम वकीलों के पास तो आय का एक ही जरिया है वह है वकालत। इसी के भरोसे ही हमारा घर बार चलता है, लेकिन पिछले साल और इस साल कोर्ट बंद रहने के कारण हमारे आय का साधन पूरी तरह से खत्म हो गया है। सरकार को भी अधिवक्ताओं की समस्या पर ध्यान देना चाहिए।
- मनप्रीत सिंह, उप प्रधान, बार एसोसिएशन अंबाला सिटी।
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पिछले साल हाईकोर्ट की ओर से आदेश आए थे कि नए वकीलों को 5 हजार रुपये तक दिए जाएंगे, लेकिन उसको लेकर भी कहां तक स्थिति पहुंची है। इस बारे में जानकारी नहीं है और अब कोर्ट पिछले एक माह से बंद है और आगे गर्मियों की छुट्टियां पड़ रही हैं। हाईकोर्ट को आर्थिक मदद के लिए पत्र लिखेंगे।
- विवेक महर्षि, महासचिव, बार एसोसिएशन अंबाला सिटी।
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अधिवक्ताओं के साथ ही उनसे जुड़े कर्मियों जैसे टाइप राइटर, फोटो स्टेट करने वाले सहित अन्य पर भी कोर्ट बंद होने का व्यापक असर पड़ा है। कोरोना काल को देखते हुए जज भी अधिकतर केसों में लंबी-लंबी तारीखें दे रहे हैं। ऐसे में लंबित वादों की संख्या बढ़ रही है। अंबाला में ही करीब 10 हजार वाद लंबित हैं।
- विशाल मित्तल, कोषाध्यक्ष, बार एसोसिएशन, अंबाला सिटी।
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वकील आर्थिक मंदी से जूझ ही रहे हैं। बार कांउसिंल ऑफ इंडिया की ओर से भी वकीलों को कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। जज ऑनलाइन माध्यम से ही जरूरी केस की सुनवाई कर रहे हैं। जैसे-जैसे कोरोना केस कम हो रहे हैं हाईकोर्ट को भी संज्ञान लेते हुए कोर्ट को पूरी तरह खोलने पर विचार करना चाहिए।
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- चंद्र मोहिनी शर्मा, सह सचिव, बार एसोसिएशन, अंबाला सिटी।
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