हरियाणा में कड़ाके की सर्दी ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि 10 साल बाद हरियाणा को ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो वर्ष 2014 में इस प्रकार के हालात बने थे।
इसके बाद के वर्षों में कभी तीन दिन तो कभी चार दिन तक सीवियर कोल्ड डे और कोल्ड डे की स्थिति बनी थी। मगर लगातार 10 दिनों तक सीवियर कोल्ड डे और कोल्ड डे के हालात नहीं बने जो इस बार देखने को मिल रहे हैं। हरियाणा में इन 10 दिनों में दिन के तापमान में काफी कमी देखने को मिली है। इससे ठंड अधिक महसूस हुई।
इसका प्रमुख कारण है कि पहले धुंध के हालात थे फिर बादलवाई ने ठंड को बढ़ाने का काम किया। मंगलवार को भी प्रदेश में यही हालात रहे। कई जिलों में सूर्य देव के दर्शन न होने के चलते दिन के तापमान में कमी देखने को मिली। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खींचड़ ने बताया कि आगामी समय में सर्दी और बढ़ने की संभावना है। हवा में बदलाव आएगा। इससे उत्तर उत्तर दक्षिणी हवा चलेगी और धुंध दोबारा से परेशान करेगी। दिन का पारा बढ़ने और रात्रि तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है।
कम हुआ दिन और रात के तापमान
मौजूदा समय में दिन और रात के तापमान का काफी कम अंतर देखने को मिल रहा है। उत्तर हरियाणा के शहरों में अंबाला में दिन और रात के तापमान में चार डिग्री सेल्सियस का अंतर है। यही स्थिति दक्षिण हरियाणा में भी बनी हुई है। जिसमें हिसार बेल्ट के जिलों में भी दिन और रात के तापमान में अंतर कम है। इसी प्रकार यही स्थिति रोहतक, सिरसा, फतेहाबाद आदि जिलों में भी देखने को मिल रही है। हालांकि एनसीआर बेल्ट में दिन और रात के तापमान में अंतर ठीक बना हुआ है। गौरतलब है कि दिन और रात के तापमान में जब अंतर कम हो जाता है तो उस स्थिति में माना जाता है कि सर्दी अधिक पड़ रही है।
इस कारण बनी ये स्थिति
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो दिन का तापमान लगातार कम हो ही रहा था, जबकि रात का तापमान पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कम हो रहा था। इसके बाद बादलवाई आने के कारण दिन का तापमान घट गया और रात्रि का तापमान बढ़ गया। इससे दोनों तापमानाें के बीच अंतराल काफी कम हो गया। इससे ठंड बढ़ी महसूस हुई।