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ईओ के फर्जी हस्ताक्षर और बिना एसीआर प्रमोट हुए 8 क्लर्कों पर जवाब-तलब

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civics - फोटो : Ambala
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अंबाला सिटी। बिना वार्षिक आंकलन रिपोर्ट (एसीआर) के 8 चपरासियों को नगर निगम अंबाला में पदोन्नत कर दिया गया। इक्का-दुक्का जिन कर्मचारियों की आधी-अधूरी रिपोर्ट बनी भी थी उन्होंने भी खुद ही ईओ के फर्जी हस्ताक्षर अपनी रिपोर्ट पर किए और उच्चाधिकारियों को पेश कर दी। इन्हीं फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर अंबाला नगर निगम में 5 कर्मचारी चपरासी से क्लर्क बन गए। जबकि 3 ऐसे कर्मचारी थे जिन्हें एसीआर जमा नहीं करवाने की विशेष छूट दी गई। जबकि बिना एसीआर के पदोन्नत करने का कोई नियम ही सरकार के पास नहीं है। यह कारनामा 2016 में किया गया। अब इस मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव हरियाणा सरकार ने अधिकारियों को जवाब तलब करते हुए एक सप्ताह के भीतर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।
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डीसी ने निगम आयुक्त को प्रेषित किया लेटर
इस पूरे मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव हरियाणा सरकार ने कार्रवाई करते हुए डीसी अंबाला को कार्रवाई के लिए लिखा। लेकिन चूंकि सीधे तौर पर यह मामला नगर निगम आयुक्त से जुड़ा है तो डीसी अंबाला की ओर से निगम आयुक्त को 1 जुलाई को पत्र प्रेषित कर 7 दिनों के भीतर पूरे मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित करने के साथ कार्यालय में भिजवाने के आदेश दिए हैं।
4 साल से दबाए रखा मामला
बता दें कि नगर निगम के अधिकारियों ने 4 साल तक इस मामले को दबाए रखा। नगर निगम में ही कार्यरत सफाई दरोगा ने दो साल पहले इस फर्जीवाडे़ को उजागर किया था। साथ ही डीसी अंबाला, डायरेक्टर अर्बन लोकल बाडी व आयुक्त नगर निगम को 2018 में शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की गुहार लगाई थी लेकिन आज तक इस मामले को अधिकारियों ने दबाए रखा।
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यूं चलती रही खानापूर्ति
नगर निगम के अधिकारियों ने पूरा मामला संज्ञान में आने और शिकायत होने के बावजूद इसे दबाए रखा। क्योंकि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हुई तो कई अधिकारियों पर भी गाज गिरनी तय है। इस मामले में तत्कालीन मंत्री कविता जैन ने भी संज्ञान लिया था। इस पर तत्कालीन निगम आयुक्त ने सभी आठों कर्मचारियों ने रिकार्ड पेश करने के आदेश दिए थे लेकिन कोई भी कर्मचारी अपना रिकार्ड पेश नहीं कर पाया था। इसके बाद नगर निगम टूट गया और मामला ठंडे बस्ते में डालकर उस पर मिट्टी डाल दी गई।
गठित की गई थी 3 सदस्यीय जांच कमेटी
बता दें कि पूरे मामले की जांच के लिए नगर निगम तत्कालीन आयुक्त सतेंद्र दूहन ने ईओ की अगुवाई में 3 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। इसमें स्थापना शाखा से अधीक्षक श्याम सुरेंद्र, मंजीत सिंह बिल्डिंग ब्रांच और सेक्शन अधिकारी विनीत को शामिल किया गया। कमेटी ने इन सभी को अपना पक्ष रखने के लिए 3 रिमाइंडर भी भेजे लेकिन यह पेश नहीं हुए। चौथा रिमांड 7 फरवरी 2018 में भेजा गया जिसमें लिखा गया किए एक सप्ताह में रिपोर्ट सहित पेश हों वरना आपको दोषी मानते हुए एकतरफा कार्रवाई कर दी जाएगी लेकिन कर्मचारी पेश नहीं हुए। इसके बावजूद आज तक कार्रवाई का इंतजार बरकरार है।
नगर परिषद में बनती थी वरिष्ठता, निगम में कर दिया प्रमोट
बात केवल फर्जी हस्ताक्षर और बिना एसीआर रिपोर्ट के प्रमोट करने तक ही सीमित नहीं है। इनमें से एक कर्मचारी तो ऐसा था जोकि कैथल नगर परिषद से अंबाला ट्रांसफर होकर आया था। नियमानुसार परिषद से ट्रांसफर कर्मचारी की पदोन्नति भी परिषद में ही हो सकती है लेकिन अधिकारियों की रहनुमाई के चलते इस कर्मचारी को निगम में पदोन्नत कर दिया गया।
मामला मेरेे संज्ञान में आ चुका है। चूंकि यह सीधे तौर पर निगम आयुक्त से जुड़ा है। इसीलिए इस मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए हमारी ओर से निगम आयुक्त को लिख दिया गया है।
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डॉ. अशोक कुमार, डीसी अंबाला।
अभी यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। फिर भी यदि कुछ ऐसा है तो इस मामले की जांच करवाई जाएगी।
डॉ. पार्थ गुप्ता, आयुक्त नगर निगम अंबाला।
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