अंबाला सदर में नगर परिषद ने रेहड़ी फड़ी मार्केट को व्यवस्थित करने के लिए डेढ़ करोड़ खर्च किए हैं। फिर भी रेहड़ी फड़ी के जरिए मुख्य बाजारों, नेशनल हाइवे पर कारोबार हो रहा है। इससे न केवल ट्रैफिक की व्यवस्था बिगड़ रही बल्कि राहगीर भी परेशान हैं। दुकानदार एक तरफ निगम की सड़क को किराये पर देकर खूब कमाई कर रहे वहीं दूसरी तरफ पार्किंग को लेकर झगड़ा करने में भी पीछे नहीं रहते। रेहड़ी-फड़ी मार्केट के लिए अलग-अलग दो जगहों पर 70-70 लाख खर्च कर मार्केट भी तैयार हो चुकी हैं लेकिन अफसर एक साल बाद भी रेहड़ी-फड़ी मार्केट को आबाद नहीं कर पाए।
एक हजार लोग कर रहे कारोबार
नगर निगम की ओर से रेहड़ी-फड़ी के जरिए कारोबार करने वाले लोगों का सर्वे करवाया गया था। तब कैंट में इनकी संख्या एक हजार से ज्यादा मिली थी। इनमें से साढ़े 500 लोग ऐसे हैं जिनका कारोबार गांधी मैदान में शिफ्ट किया गया है। रेहड़ी-फड़ी मार्केट में ये लोग कारोबार करते हैं। इसके अलावा बाकी रेहड़ियां लगा रहे हैं। दीना की मंडी के साथ-साथ गांधी मैदान में रेहड़ी-फड़ी के लिए जगह बना दी गई है। लेकिन निगम अफसर यहां पर रेहड़ी-फड़ी को शिफ्ट करने में नाकाम साबित होते हुए हैं।
मंडे मार्केट बनी जाम की वजह
मंडे मार्केट छावनी में काफी सालों से सोमवार के दिन सदर बाजार में लगती थी। जिससे आम जनता सस्ते दाम पर सामान खरीद कर ले जाती थी। सदर बाजार के कुछ दुकानदार इस मार्केट से खफा थे तो बाकी अपनी दुकान के आगे रेहड़ी-फड़ी लगाने की एवज में पैसा वसूलते थे। तत्कालीन निगम प्रशासन ने जाम और अस्थायी अतिक्रमण का हवाला देकर सदर बाजार से मार्केट को गांधी मैदान में शिफ्ट कर दिया था जिसके कुछ समय तक सदर बाजार जाम से मुक्त रहा लेकिन कुछ समय के बाद अस्थाई अतिक्रमण पूरी तरह से अपने पैर पसार चुका है। पहले से स्थिति अब और ज्यादा गंभीर हो गई है क्योंकि अस्थायी अतिक्रमण एक दिन के बजाए सप्ताह भर रहता है। निगम की ओर से जुर्माने की कार्रवाई रेंट ब्रांच की अस्थाई कर्मियों की आपसी मिलीभगत के चलते बंद हो गई।
पहला प्रोजेक्ट
दीना की मंडी में 70 लाख का नहीं मिला फायदा
छावनी में दीना की मंडी में करीब 300 रेहड़ियों की क्षमता वाली एक रेहड़ी मार्केट बनाई गई है जिसका काम अगस्त 2018 में पूरा हो गया था। एक साल बीत जाने के बाद भी मार्केट आबाद नहीं हो पाई। रेहड़ी सदर बाजार, हिल रोड, निकलसन रोड, चौड़ा बाजार, हनुमान मार्केट, सर्राफा बाजार, कबाड़ी बाजार, विजय रत्न चौक, राय मार्केट समेत अन्य जगह पर अभी भी लगी हैं। लेकिन निगम अधिकारी इन रेहड़ियों को मंडियों में शिफ्ट करने से पीछे हट रहे हैं क्योंकि मार्केट का अभी किसी राजनेता ने शुभारंभ नहीं किया है जबकि राजनेता के शुभारंभ के चक्कर में जनता बाजारों में बेहाल है।
दूसरा प्रोजेक्ट
जगह होने के बावजूद हाईवे किनारे रेहड़ियां
जगाधरी नेशनल हाईवे के किनारे गांधी मैदान बना है जिसमें निगम ने मंडे मार्केट को शिफ्ट किया था। यह मंडे मार्केट मैदान में सामाजिक, धार्मिक या बारिश से कीचड़-जलभराव के कारण नेशनल हाईवे के किनारे लगती है। इसीलिए नेशनल हाईवे संकरा हो जाता है और जाम गीता गोपाल चौक तक पहुंच जाता है। इस मार्केट के लिए डंपिंग ग्राउंड वाली जगह निश्चित कर दी गई है। इसके साथ ही 35 लाख की नई जगह बना दी गई। लेकिन यहां पर भी इसे शिफ्ट नहीं किया जा रहा है ताकि जगाधरी नेशनल हाईवे पर जाम न लगे। निगम की ओर से डंपिंग ग्राउंड का निर्माण भी 35 लाख की लागत से किया गया था।
-छावनी में एक जगह जाम की स्थिति नहीं है बल्कि सभी तरफ जाम है। दीना की मंडी में रेहड़ी मार्केट को मैंने चेक नहीं किया है और नेशनल हाईवे पर जाम के लिए सिर्फ नगर परिषद अकेले जिम्मेदार नहीं है बल्कि ट्रैफिक पुलिस को भी वहां पर अपनी व्यवस्था बनानी चाहिए। जो नहीं हुई है बाकी हम अपनी तरफ से पुलिस को इस संबंध में लिखेंगे कि हाईवे पर जाम की स्थिति पैदा न हो।
-विनोद नेहरा, ईओ, नगर परिषद अंबाला छावनी।