पंजाब पुलिस से पिटने के बाद छिपते-छिपाते सैकड़ों प्रवासी अंबाला में पहुंचे। इन्हें काबू करने के लिए पुलिस के पसीने छूट गए। करीब 2 घंटे की मशक्त के बाद प्रवासी मजदूरों को जंडली पुल के नीचे एकत्रित किया गया। यहां से पुलिस ने प्रवासियों को वापस भेजने के लिए कई बार प्रयास किया। उन्हें हर जरूरी व्यवस्था के साथ ट्रक में वापस छोड़ने की बात कही। इससे पहले सभी को खाना भी खिलाया गया। लेकिन वापस घर जाने की जिद पर अड़े प्रवासी नहीं माने। पुलिस के साथ ही झड़प करने लगे। इसी बीच भीड़ का हिस्सा बनी एक महिला ने सब इंस्पेक्टर के गिरेबान को पकड़ लिया और उसे धक्का दे दिया। साथ ही सभी मजदूर पैदल ही आगे बढ़ गये। जिससे हालात बेकाबू हो गये। मजबूरन स्थिति को संभालने के लिये पुलिस ने डंडा उठाया और हल्के बल का प्रयोग कर भीड़ पर काबू पाया।
भागते हुए एक दूसरे को पैरों तले रौंदा
प्रवासियों की यह भीड़ इतनी उत्तेजित हो गई कि जब पुलिस ने इन्हें रोकना चाहा और भागने लगे तो भागते-भागते कुछ प्रवासी नीचे गिर गये। पुलिस से बचने के लिए भीड़ ने नीचे गिरे लोगों को अपने पैरों तले रौंद दिया।
बुलाना पड़ा अतिरिक्त पुलिस बल
जब हालात बेकाबू हो गए तो मौके की नजाकत को समझते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाना पड़ा। इसके बाद प्रवासी आगे-आगे और पुलिस पीछे-पीछे इस तरह पुलिस इन सभी को पंजाब बार्डर की तरफ ले गई।
नदी-नाले पार कर पहुंचे थे अंबाला
नदी-नाले पार कर प्रवासी अंबाला में पहुंचे थे। प्रवासी जब जंडली पुल के पास पहुंचे तो नाके पर खड़ी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। संख्या बढ़ते-बढ़ते 300 के पार पहुंच गई। इनके खाने के लिए पुलिस प्रशासन ने वहीं व्यवस्था करवाई। सभी प्रवासी घर जाने की रट लगाए हुए थे। पुलिस ने खूब मनाया और 4 ट्रकों का इंतजाम किया गया ताकि सभी को इनमें बिठाकर वापस भेजा जा सके। एक बार तो कुछ प्रवासी तैयार हो गए लेकिन बाकी अड़ गए।
जब पुलिस को देनी शुरू की गालियां.....
सर्विस लेन पर आते ही प्रवासी आगे बढ़ने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस उनके सामने अड़ गई। उग्र भीड़ में से ही कुछ लोगों ने पुलिस को गंदी-गंदी गालियां देनी शुरू की। बस अब पुलिस के सब्र का बांध टूट गया। लाठी चार्ज करते हुए सभी प्रवासी मजदूर को खदेड़ दिया और भगदड़ मच गई।
फौज तुम्हें घुसपैठिया मानकर मार देगी गोली.....
कुछ बचाव के लिए झाड़ियों से नीचे उतर कर साथ लगते नाले को पार कर आर्मी एरिया में घूस गये। पुलिस ने कहा कि वापस आ जाओ। अगर वहां रहे तो फौज तुम्हें घुसपैठिया समझ कर गोली मार देगी। गोली लगने के डर से प्रवासी वापस सड़क पर आ गए।