नारायणगढ़। गांव बधौली में अज्ञात बीमारी की चपेट में आने से करीब 3 दर्जन पशुओं ने दम तोड़ दिया है। दर्जनों पशु अभी मौत और जिंदगी से जूझ रहे हैं। लिहाजा गांव में दहशत का माहौल है। अंबाला पशुपालन विभाग के साथ-साथ हिसार की टीम भी गांव का दौरा कर सैंपल भर चुकी है लेकिन अभी तक किसी को यह समझ नहीं आ रहा कि इन पशुओं की मौत आखिरकार किस कारण और बीमारी से हुई है। एक के बाद लगातार एक गाय, भैंस, कटरी, झोटा इत्यादि की मौत से ग्रामीणों में दशहत का माहौल है। पशुधन की मौत से कई घर पूरी तरह उजड़ गए हैं। क्योंकि इनकी रोजी रोटी का साधन ही खत्म हो गया है। ऐसे-ऐसे पशुपालक है जिनके पास 5-6 दुधारू पशु थे और सारों की जिंदगी इस बीमारी ने लील ली।
किन-किन पशु पालकों के मरे गए पशु
ओमबीर पुत्र तेजपाल के 6 पशु मारे गए हैं। इनमें 4 भैंस,1 गाय,1 झोटा शामिल हैं। वहीं एक कटड़ी की हालत अभी गंभीर है। जय कुमार की एक कटड़ी, हरपाल पुत्र काबिज सिंह की एक गाय, एक भैंस,एक झोटा मर चुके हैं व एक गाय की हालत गंभीर हैं। मनोज पुत्र पप्पू के 5 पशु मृत व एक भैंस-गाय व झोटा सीरियस हैं। राजेंद्र पुत्र गुलाब सिंह की एक भैंस, फकीरिया पुत्र भरतु की एक भैंस मारी गई है जबकि 4 पशु बीमार हैं। जोगिंदर पुत्र नेत्रपाल की एक गाय, हेमसिंह पुत्र बाज सिंह की एक भैंस व एक गाय मारे गए। पिंदा पुत्र मौलड़ के 4 पशु, मांगा पुत्र मदन की भैंस गंभीर है। कर्ण सिंह पुत्र बाबु राम की एक गाय, सुरेंद्र पुत्र लाभ सिंह का झोटा, रिंपी पुत्र रोहतास की 2 भैंस व एक गाय, पीताम्बर पुत्र साधु की भैंस, सुखदेव पुत्र रघबीर सिंह की 2 भैंस मारी गई हैं।
11 कर्मचारियों की टीम बचाव में जुटी
इस बारे बीमारी की जांच करने के लिए चिकित्सा विभाग के 11 कर्मचारी जुटे हैं। यही मौके पर दवाएं दे रहे हैं जिनमें 3 चिकित्सक व 8 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद हैं।
खाली हो गए पशुओं के खूंटे
ग्रामीण बोबी, काबिज सिंह, चमन सिंह, राजेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, पदम सिंह, विजय पाल सिंह आदि का कहना था कि उनके गांव में यह बीमारी कहां से आई या क्या है इस बारे कहना मुश्किल है। कई पशु पालकों के तो खूंटे खाली हो चुके हैं जिनका मुख्य व्यवसाय ही दूध बेचकर गुजारा करना था।
जैसे कि ओमबीर के साथ हुआ है। इन लोगों के घरों में इस समय मातम का माहौल है।
9 मार्च को मुझे जानकारी मिली थी। इसके बाद से लगातार उपचार चल रहा है। टैबनस मक्खी जोकि गंदगी से पैदा होती है उससे इस तरह की बीमारी फैलती है। हालांकि अभी बीमारी क्या है इस बारे में सही नहीं बताया जा सकता लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है। यह छूत या मुंह खुर की बीमारी नहीं है।
डॉ. दीपक, पशु चिकित्सक।
हिसार से टीम पहले 12 फिर 17 मार्च को आई थी। पशुओं के रक्त और नाखूनों के सैंपल टीम अपने साथ लेकर गई है। जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि किस बीमारी से पशुओं की मौत हुई है।
-अनिल शर्मा, एसडीओ पशुपालन विभाग नारायणगढ़।