डेरा सच्चा सौदा की अनुयायी 95 वर्षीय भूल्ली देवी का शरीर अब रिसर्च के काम आएगा। परिवार ने सहमति के बाद शुक्रवार को उनका शव एमएम इंस्टीच्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च के चिकित्सकों को सौंप दिया। रिसर्च के लिए जिस गाड़ी में शव गया उसे परिवार की ओर से सजाया गया था। इस दौरान शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सेवादार भी वर्दी में पहुंचे थे। मां के इस अनोखे फैसले का असर पूरे परिवार में है। इसी वजह से परिवार के पांच सदस्य भी देहदान के लिए फार्म भर चुके हैं। रूढ़िवादी समाज की सोच से ऊपर उठकर मां की देह का दान करने से पूरे परिवार की सराहना हो रही है।
ठंड की वजह से हुई मौत
सेक्टर-8 की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले रिटायर्ड एसडीओ कृष्ण दास मेहमी ने बताया कि 95 साल की उम्र में भी उनकी मां भूल्ली देवी वीरवार दोपहर तक पूरी तरह तंदुरुस्त थी। उन्हें कोई बीमारी नहीं थी। पर वीरवार शाम को ठंड की वजह से उनकी तबीयत खराब हो गई। छाती में ज्यादा दिक्कत के कारण उन्हें प्राइवेट अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। उपचार के दौरान शुक्रवार को उन्होंने आखिरी सांस ली। बेटे ने बताया कि उनका पूरा परिवार डेरा सच्चा सौदा सिरसा का अनुयायी है। वहीं से प्रेरणा लेकर मां ने अपना देहदान करने का निर्णय लिया था। मिशन से प्रेरित होकर ही निधन के बाद मां का शव रिसर्च के लिए एमएम मेडिकल कॉलेज को सुपुर्द किया गया है।
चार सदस्य भी भर चुके हैं फार्म
आमतौर पर लोग मरने के बाद देहदान से कतराते हैं। पर ऐसे समाज के ऐसे लोगों के लिए भूल्ली देवी के परिवार ने ऐसी गाथा लिखी है जो हमेशा याद रखी जाएगी। बेटे केडी मेहमी ने बताया कि मां के इस फैसले से पूरा परिवार प्रभावित हुआ था। इसी वजह से मैंने व मेरे भाई बलराम तथा मेरी पत्नी बिमला इंसा व भाभी शायरा इंसा भी अपना देहदान के लिए फार्म भर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मां के फैसले से तीनों बहनों कृष्णा देवी, सुखविंद्र कौर व सीता देवी को भी अवगत करवा दिया था। पूरे परिवार की सहमति के बाद ही शव घर से रवाना किया गया।
रिसर्च के साथ दूसरों को मिले जिंदगी
मेहमी ने बताया कि उन्होंने अपनी मां का मृत शरीर रिसर्च के लिए एमएम इंस्टीच्यूट के हवाले किया है। रिसर्च के बाद अगर जरूरत के अंगों से किसी दूसरे व्यक्ति की जान बचाई जा सके तो उनका इस पुण्य कार्य में इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह हमारे गुरुदेव मानवता की भलाई के लिए मिशन चला रहे हैं। हमारा पूरा परिवार उनके ही नक्शे कदम पर लोगों की भलाई का काम कर रहा है।