अंबाला कैंट। पहले लोगों ने डेंगू को जमकर डराया तो अब चिकनगुनिया ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। जिला में डेंगू के जहां 268 केस सामने आ चुके हैं, वहीं चिकनगुनिया के छह मरीज सामने आए हैं। सबसे पहले कैंट की लालकुर्ती इलाके में डेंगू का कहर बरपा तो अब बलदेव नगर और तोपखाना में मरीज सामने आ रहे हैं। यह तो स्वास्थ्य विभाग का आंकड़ा है, जबकि निजी अस्पतालों व क्लीनिकों में ऐसे मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। सिटी के हलवाई बाजार में लज्जा राम अग्रवाल, सिटी रामनगर में शिक्षक सी. प्रकाश को भी चिकनगुनिया हो चुका है, जिनका इलाज निजी अस्पताल में कराया जा रहा है।
निजी अस्पतालों व क्लीनिकों में मरीजों की भरमार
डेंगू और चिकनगुनिया को लेकर लोगों में दहशत बरकरार है। हालांकि माना जा रहा है कि करीब एक महीने खतरा रहेगा, लेकिन वर्तमान में जो स्थिति है, उससे लोग भी डरे हुए हैं। विभाग की मानें तो अब तक डेंगू के 268 केस सामने आ चुके हैं, जबकि चिकनगुनिया के छह केस मिले हैं। हालांकि इन केसों की संख्या बढ़ सकती है, जबकि विभाग निजी क्लीनिकों व अस्पताल में आने वाले ऐसे मरीजों को संदिग्ध मानता है और इसी कारण से विभाग के आंकड़ों में यह मरीज शामिल नहीं होते। सूत्रों की मानें तो निजी अस्पतालों व क्लीनिकों में ऐसे मरीजों की संख्या काफी अधिक है, जबकि लैब संचालक भी कहते हैं कि डेंगू के मरीज काफी संख्या में आ रहे हैं, जबकि कईं मरीजों के चिकनगुनिया के टेस्ट भी किए जा रहे हैं।
ऐसे होता है चिकनगुनिया
चिकनगुनिया एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर जब किसी संक्रमित व्यक्ति अथवा बंदर को काटता है तो उसकी लार में यह वायरस पहुंच जाता है। इसके बाद ऐसा मच्छर जब स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो वह चिकनगुनिया की चपेट में आ जाता है।
ये हैं लक्षण
- चिकनगुनिया के लक्ष्ण सात से दस दिनों में दिखाई देते हैं
- ठंड लगकर तेज बुखार होना
- सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में तेज दर्द
- जोड़ों में सूजन अथवा विकृति
- जी मिचलाना, भूख कम लगना
- कमजोरी आना, प्रकाश सहन न होना
- शरीर पर चकत्ते निकलना
चिकनगुनिया का उपचार
- पीड़ित मरीज को लक्षणों के आधार पर चिकित्सक द्वारा दवा दी जाती है
- मरीज को पर्याप्त आराम करना चाहिए और तरल पदार्थ अधिक पीने चाहिएं
- हालांकि इसकी विशेष दवा नहीं है, फिर भी दर्द कम करने अथवा बुखार की दवा दी जाती है
इस तरह से करें बचाव
- घर में कीटनाशक दवा का स्प्रे करवाएं
- कूलर में यदि पानी है तो सूखा दें
- खुले पड़े गमले आदि में पानी जमा न होने दें
- ऐसे कपड़े पहनें जिससे शरीर पूरी तरह से ढक जाए
- खिड़की और दरवाजों में जाली लगवाएं और शाम होते ही दरवाजे बंद करें
- यदि बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें
वर्जन
डेंगू को लेकर जहां विभाग सतर्क है, वहीं चिकनगुनिया के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। फिलहाल मरीजों की स्थिति ठीक है, जबकि लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। डेंगू और चिकनगुनिया से घबराने की आवश्यकता नहीं है। सिविल अस्पताल में ऐसे मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था है।
- डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमओ अंबाला
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एक कॉलोनी पर मेहरबानी, जरा इधर भी दो ध्यान
डेंगू और मलेरिया का खतरा अभी टला नहीं है, जबकि अभी तक मात्र एक ही रिहायशी इलाके में कार्रवाई हुई है। ऐसे में प्रशासन की अनदेखी अन्य इलाकों पर भारी पड़ सकती है। कईं इलाके ऐसे हैं जहां पर गंदगी है, जबकि पानी निकासी की व्यवस्था तक नहीं है।
उल्लेखनीय है कि अंबाला कैंट की लालकुर्ती में बिगड़ी सफाई व्यवस्था के चलते जहां डेंगू व बुखार से लोग बुरी तरह पीड़ित हुए, वहीं निगम की सफाई व्यवस्था की पोल भी खुल गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए कि निगम के सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नहीं आते, जबकि शिकायत पर भी कोई सुनवाई नहीं होती। जब हालात बिगड़े तो प्रशासन ने सफाई व्यवस्था व फोगिंग करवाई।
दूसरी ओर कईं इलाके ऐसे हैं, जहां पर गंदगी की भरमार है और पानी गंदे निकासी की भी व्यवस्था नहीं है। अंबाला कैंट की ग्वाल मंडियां, तिब्बत कॉलोनी, बीडी फ्लोर मिल के पीछे की कॉलोनियां, बारह क्रॉस रोड, खटीक मंडी आदि ऐसे इलाके हैं, जहां गंदगी की भरमार है। सबसे ज्यादा बुरे हालात ग्वाल मंडियों के हैं, जहां पर गंदगी का जमावड़ा है। प्रशासन अभी तक इन क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त ही नहीं करवा पाया है। हालात ऐसे हैं कि कभी भी हालात बिगड़ सकते हैं। हाल ही में नगर निगम की बैठक में पार्षद ने सफाई व्यवस्था के बुरे हालात दिखाते हुए पोस्टर तक मीटिंग हॉल में लगा दिए, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है।
यह कहते हैं लोग
कैंट के रहने वाले अजय प्रकाश, युवराज वालिया, संदीप चौहान, कीर्ति प्रसाद, जगदीश लांबा, बनारसी दास, सतिंदर सिंह, महेंद्र सिंह, सिटी के विकास गुप्ता, महेश वर्मा, मंजीत सिंह, जगजीत सिंह का कहना है कि जब तक हो-हल्ला न किया जाए, तब तक कोई सुनता नहीं है। इसके बाद सफाई होती है, लेकिन बाद में फिर वही हालात हो जाते हैं। लोग भी अब यह सब करते हुए थक चुके हैं, जबकि अधिकारी सिर्फ आश्वासन ही देते हैं।
वर्जन
सफाई व्यवस्था को लेकर निगम पूरी तरह से गंभीर है। जहां से भी शिकायत आती है, वहां पर कर्मचारियों को भेजा जाता है। वैसे भी नियमित रूप से सफाई करवाई जा रही है। यदि फिर भी कहीं कोई कमी है तो उसे दूर कराया जाएगा।
- रमेश मल, मेयर, नगर निगम अंबाला