अंबाला। नागरिक अस्पताल में ऑपरेशन से 25 फरवरी को हुई डिलिवरी के दौरान महिला के पेट में पट्टी छूटने के आरोप का मामला चंडीगढ़ कंज्यूमर कोर्ट में पहुंच चुका है। परिजनों ने कोर्ट में केस डालकर इंसाफ की गुहार लगाई है। अब 18 मई की तारीख लगी है।
बता दें कि करीब ढ़ाई माह बाद भी महिला को इंसाफ नहीं मिला है। स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय से जांच का जिम्मा छावनी नागरिक अस्पताल को सौंपा गया था लेकिन अभी तक परिजनों को कोई जांच रिपोर्ट का पता नहीं चल पाया है। यहीं कारण था कि गत दिवस ही 6 मई को परिजनों ने हेल्थ मिनिस्टर मनसुख लाल मांडवीया को भी पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। आरोप है कि महिला डॉक्टर की लापरवाही बरती है। महिला के पिता धर्मवीर ने बताया कि वह अपनी बेटी को इंसाफ दिलवाकर ही रहेंगे। सबसे पहले उन्होंने इस मामले में 11 अप्रैल को प्रिंसिपल सेक्रेटरी सहित सीएमओ व संबंधित डॉक्टर को जवाब के लिए लीगल नोटिस भी भेजा है। बता दें कि 25 फरवरी को छावनी नागरिक अस्पताल में प्रसव पीड़ा उठने पर सदर के जामा मस्जिद के निकट निवासी महिला प्रसव पीड़ा उठने पर आई थी। दर्द ज्यादा होने पर डॉक्टर ने ऑपरेशन लिख दिया था। बाद में परिजनों के आरोप है कि पेट में पट्टी का टुकड़ा रह गया था जो निजी अस्पताल में ऑपरेशन करके निकाला गया है।
यह था पूरा मामला
महिला के पिता धर्मवीर का कहना है कि डॉक्टरों की लापरवाही का ही नतीजा है कि आंत के साथ ही पट्टी को टांके लगाकर सील दिया। बेटी की जान पर बन आई थी। करीब 10 लाख खर्च हो चुके हैं और ढाई माह बाद भी बेटी को केवल एक रोटी ही नसीब है। बता दें कि जामा मस्जिद सदर बाजार के निकट निवासी महिला की शादी पंचकूला में हुई थी। पहला बच्चा था और वह नागरिक अस्पताल में आ गई थी। ऑपरेशन के बाद बच्चा हुआ था लेकिन दर्द रहने लगा था। पीजीआई रेफर करने के बाद भी आराम नहीं आया। अल्ट्रासाउंड व एक्सरे के अलावा जब सीटी स्कैन करवाया तो प्राइवेट अस्पताल ने इसे पकड़ा और पट्टी का टुकड़ा निकाला।