स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में कैथ लैब स्थापित की जाएगी। प्रथम चरण में प्रयोग के तौर पर 6 जिलों में इस तरह के लैब स्थापित करने की निर्णय लिया गया है। इसके बाद सभी जिलों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। इस योजना पर पर काम भी चल रहा है।
उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों की अनदेखी के कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों का आना बंद हो गया था, लेकिन अब सुविधाओं में सुधार होने से लोगों का सरकारी अस्पतालों के प्रति विश्वास बढ़ा है और मरीज सरकारी अस्पतालों में निशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ हासिल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा राजकीय अस्पतालों में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी जिला अस्पतालों में चरणबद्ध तरीके से एमआरआई और डायलसिस की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं और सामाजिक दायित्व के तहत निजी क्षेत्र के बडे़ उद्यमियों व औद्योगिक घरानों के सहयोग से सभी अस्पतालों में आईसीयू भी स्थापित करने की योजना तैयार की गई है।
उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में एमआरआई की सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि इस टेस्ट के लिए निजी क्षेत्र में 4500 से 6 हजार रुपये वसूल किए जाते हैं जबकि सिविल अस्पताल में यह सुविधा केवल 1800 रुपये में उपलब्ध होगी।