अंबाला। कैंटोनमेंट बोर्ड के राजस्व में तीन गुणा की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी अंबाला-जगाधरी हाइवे पर बने ग्रेस पैलेस की बोली से हुई है। अब ग्रेस पैलेस को ठेके पर देने से सालाना एक करोड़ का राजस्व कैंटोनमेंट बोर्ड के खाते में आएगा और फिर यह पैसा बोर्ड के अधीन नए विकास कार्याें और स्थानीय निवासियों की मूलभूत सुविधाओं पर लगाया जाएगा।
दरअसल पिछले वर्ष ग्रेस पैलेस का ठेका 12 लाख में दिया गया था, हालांकि 18 प्रतिशत जीएसटी इस राशि से अलग थी। वहीं इस बार ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के तहत प्रतिवर्ष के हिसाब से 36 लाख रुपये में ग्रेस पैलेस का ठेका जारी किया गया है और इसमें भी 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से लिया जाएगा।
इस बार ग्रेस पैलेस की बोली के लिए 16 लाख रुपये की राशि का निर्धारण किया गया था, यानी की 16 लाख रुपये से बोली की शुरुआत की गई जोकि कामयाब रही। इसमें 5 ठेकेदारों ने रुचि दिखाई। शुरुआती दौर में ही बोली का दायरा 22 लाख रुपये पार कर गया था। जब बोली 30 लाख के पार हुई तो दो ठेकेदार ही बार-बार रकम को बढ़ाते रहे।
नियमों में किया बदलाव
ग्रेस पैलेस को पहले तीन साल के अनुबंध पर ठेकेदार के सुपुर्द किया जाता था। लेकिन अब यह समय अवधि दो साल के लिए बढ़ा दी गई है, यानी अब ग्रेस पैलेस पांच वर्ष के लिए ठेकेदार के पास रहेगा। इससे कैंटोनमेंट बोर्ड को भी अतिरिक्त कमाई होगी। पहले जहां तीन वर्ष में 36 लाख के करीब बोर्ड को राजस्व के तौर पर मिलते थे। लेकिन अब पांच वर्ष करने से यह राशि 1.80 करोड़ तक पहुंच जाएगी।
ग्रेस पैलेस को इस बार पांच वर्ष के ठेके पर दिया गया है। पहले के मुकाबले इस बार बोली में भी तीन गुणा तक वृद्धि हुई है। इससे बोर्ड को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। यह पैसा मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और रख-रखाव पर लगाया जाएगा।
राहुल आनंद शर्मा, सीईओ कैंट बोर्ड।