अंबाला। गिरते भूजल स्तर और भविष्य के जल संकट को देखते हुए कैंट बोर्ड ने जल संचय-जन भागीदारी अभियान को धरातल पर उतारने की तैयारी कर ली है। बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) को जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की पहचान करने और उन पर बजट खर्च करने के लिए अधिकृत कर दिया है।
मिशन मोड में शुरू होगा काम
इस योजना का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से जल संचयन करना और भूजल स्तर को सुधारना है। सीईओ अब न केवल इन कार्यों की पहचान करेंगे, बल्कि संबंधित बजट हेड से तत्काल प्रभाव से राशि जारी कर निर्माण कार्य भी शुरू करा सकेंगे, इसके लिए बोर्ड ने 12 विशेष प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का चयन किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि उन्हीं परियोजनाओं को मंजूरी दी जाएगी जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य होंगी और जिनका सीधा प्रभाव क्षेत्र के वाटर स्तर पर पड़ेगा।
इन 12 बिंदुओं पर केंद्रित रहेगा अभियान
अभियान के तहत शहर के पुराने तालाब और बावड़ियों का कायाकल्प किया जाएगा। इसी प्रकार सरकारी और निजी भवनों की छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाए जाएंगे। पुराने बोरवेल और कुओं को ग्राउंड वाटर रिचार्ज शाफ्ट में बदला जाएगा। दूषित पानी को वेस्ट वाटर मैनेजमेंट के तहत शोधित कर दोबारा उपयोग में लाना। हरित पट्टी का विकास के तहत जल संरक्षण से जुड़ी विशेष वनरोपण योजना को शामिल किया गया है।
जन भागीदारी पर विशेष जोर
बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि पानी बचाने का मिशन केवल सरकारी प्रयास से सफल नहीं होगा, इसके लिए महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों, स्कूल के बच्चों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। स्कूल स्तर पर जल संचयन की तकनीकें सिखाई जाएंगी ताकि भविष्य की पीढ़ी जल के महत्व को समझ सके।
हमारा लक्ष्य ऐसे कार्यों को प्राथमिकता देना है जो तकनीकी रूप से मजबूत हों और जिनका परिणाम धरातल पर दिखे। कैंट की हर उस जगह को चिह्नित किया जा रहा है,जहां वर्षा जल को जमीन के नीचे भेजा जा सकता है।
- राहुल आनंद शर्मा, सीईओ, कैंट बोर्ड।