सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के लिए सरकार ने आम बजट में बीमा शुल्क भुगतान, पेंशन लाभ व उद्योगों के लिए ब्याज की पेशकश की है। इसके चलते जिले के साइंस व मिक्सी उद्योगों को संजीवनी मिल गई है। वहीं व्यापारियों की मानें तो उन्हें आम बजट से काफी आशा थी। माना जा रहा था कि व्यापारी हित के लिए तमाम योजनाएं चलाकर राहत दी जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। सभी को मायूसी हाथ लगी है।
अंबाला साइंस व मिक्सी उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर छोटे व बड़े कई कारोबारी मौजूद हैं, जिनको आम बजट से काफी अपेक्षा थी। साइंस उद्योग निर्माण व निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान उमेश गुप्ता ने बताया कि इस बार सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग के लिए बीमा के लिए 100 प्रतिशत शुल्क देने का प्रस्ताव रखा गया है, जोकि सरकार उद्यमियों के लिए भुगतान भी करेगी। वहीं लगभग 3 करोड़ खुदरा ट्रेडर्स और दुकानदार के लिए पेंशन लाभ की सुविधा मिलेगी। साथ ही पंजीकृत सभी जीएसटी कारोबारियों के लिए दो प्रतिशत ब्याज की छूट मिलने से काफी राहत मिली है, जोकि साइंस व मिक्सी उद्योग के लिए संजीवनी का काम करेगी। वहीं साइंस उद्यमी पुनीत कुमार का कहना है कि अंबाला में माइक्रोस्कोप, ग्लास और अन्य उपकरण बनते हैं। सरकार पूरे देश में एक समान टैक्स प्रणाली लागू करनी चाहिए। एक बार ही टैक्स लगाए जाएं और उसको बार-बार न बदला जाए।
मिक्सी उद्योग को मिलेगी राहत
अंबाला का मिक्सी उद्योग भी अब हाशिये पर जाता दिखाई दे रहा है। मिक्सी उद्योग से जुड़े अश्विनी गोयल का कहना है कि टैक्स अधिक है, जिसके कारण यह उद्योग अब लोग छोड़ रहे हैं। जिलेभर में करीब 50 इकाइयां काम कर रही हैं, जबकि पहले संख्या अधिक होती थीं। घरों में बिना रजिस्ट्रेशन काम करने वाली इकाइयां भी हैं। दूसरा अब विदेशों से ऑर्डर भी कम ही मिल रहे हैं। हालांकि सरकार की तरफ से छोटे व लघु उद्योगों के लिए बजट में राहत की पेशकश की गई है, जिससे कुछ राहत मिलेगी।
व्यापारी वर्ग : जीएसटी पर एक हो स्लैब
अंबाला कैंट सदर बाजार एसोसिएशन के प्रधान विकास बत्रा ने कहा कि अगर सरकार कपड़ा व्यापार में सभी तीन स्लैब को खत्म करके एक स्लैब बना देती है तो इससे व्यापारियों को काफी लाभ मिलेगा। साथ ही जो न्यूनतम स्लैब लगाया जाता है, उसको सबसे शुरुआती तौर पर लगाया जाना चाहिए ताकि व्यापारियों को जो कागजी कार्रवाई करने में समय व्यर्थ जाता है उससे वह बच सके। साथ ही इस कारण उन्हें परेशानी भी न हो। अगर इसमें सुधार होता तो व्यापारियों को बहुत अधिक सुविधा व लाभ मिलता।
इलेक्ट्रानिक उत्पाद : टैक्स में नहीं मिली राहत
इलेक्ट्रानिक उत्पादों के व्यवसायी दविंदर सिंह का कहना है कि यह उत्पाद अब आम व्यक्ति की जरूरत बन चुके हैं। ऐसे में यदि सरकार इन पर टैक्स आदि कम करती है, तो इनकी बिक्री ज्यादा हो सकती है। इलेक्ट्रानिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की स्कीमों पर भी नियंत्रण होना चाहिए क्योंकि वितरकों को यह उनकी सेल के अनुसार स्कीम देते हैं, जबकि यह सभी के लिए एक समान होनी चाहिए।