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Ambala News: अंबाला में सक्रिय कांग्रेस के दोनों गुट

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अंबाला छावनी के रेस्ट हाउस में पत्रकारवार्ता करते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा।
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अंबाला। विधानसभा चुनाव आने से पहले ही अंबाला में कांग्रेस के कुमारी सैलजा गुट और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गुट सक्रिय हो गए हैं। एक दिन पहले जहां सांसद कुमारी सैलजा ने छावनी में अपने साथ जुड़े कांग्रेसी नेताओं के साथ कार्यक्रम किया तो शुक्रवार को पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी यहां सक्रिय नजर आए।
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कांग्रेस के दोनों कद्दावर नेताओं का अपने-अपने समर्थकों के साथ क्षेत्र में आना चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि पूर्व सीएम हुड्डा एक कांग्रेसी नेता के यहां शोक में शामिल होने आए थे। मगर इस कार्यक्रम के बाद उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पत्रकारों को भी संबोधित किया। इस दौरान जब उनसे कुमारी सैलजा की ओर से वीरवार को दिए बयान के बारे में पूछा तो उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि जो भी टिकट वितरण हुआ वह कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर था।
पहले कुमारी सैलजा का आज का बयान सुन लें, इसके बाद प्रश्न करें। इतना ही इन नेताओं का अंबाला में आना अपने आप में दिखा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में दोनों ही गुटों के नेताओं की तरफ से टिकट के लिए जद्दोजहद होगी।
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शहर में भी रहेगा संघर्ष

अभी विधानसभा चुनाव की घोषणा होने में समय है, मगर मौजूदा परिदृश्य को देखकर अलग ही स्थिति नजर आ रही है। अंबाला जिला में चार विधानसभाएं हैं। इसमें अंबाला सिटी, अंबाला कैंट, नारायणगढ़ और मुलाना शामिल हैं। कांग्रेस में सबसे अधिक संघर्ष अंबाला सिटी में नजर आ रहा है। यहां दोनों गुटों से कई नेता खड़े हैं। इसमें सैलजा गुट से रोहित जैन, सुखबिंदर जैलदार, चेतन चौहान, बलविंदर पुनिया और रिंकू पुनिया सक्रिय हैं। हुड्डा गुट से अंबाला सिटी में पूर्व मंत्री निर्मल सिंह, पूर्व विधायक जसबीर मलौर, डिप्टी मेयर राजेश मेहता, हिम्मत सिंह, जग्गा खैरा और अमीषा चावला दम भरते दिखते हैं।
अंबाला कैंट विधानसभा से सैलजा गुट से पूर्व पार्षद परविंदर सिंह परी तो हुड्डा गुट में चित्रा सरवारा क्षेत्र में प्रचार करते दिख रहे हैं। ऐसे में चर्चा यह भी है कि हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में घर वापसी करने वाले पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के परिवार को दो टिकट मिलेंगे या नहीं। यह प्रश्न कुमारी सैलजा से भी पूछा तो उन्होंने मेरिट पर टिकट देने और मेरा तेरा की राजनीति से दूर रहने की पार्टी नेताओं को नसीहत दी। नारायणगढ़ में पहले से ही शैली चौधरी विधायक हैं। ऐसे में इसी सीट पर अभी कोई प्रतिद्वंदी दिखाई नहीं देता। इसी प्रकार मुलाना आरक्षित सीट पर वरुण चौधरी के सांसद बनने के बाद अब यह सीट खाली है। अभी तक वरुण के परिवार ने यहां से चुनाव लड़ा है अब आगे उनका परिवार आगे आता है या किसी और कांग्रेसी को मौका मिलता है यह भी देखने वाली बात रहेगी। वरुण चौधरी को भी पूर्व सीएम हुड्डा गुट से ही जोड़कर देखा जाता रहा है।

अंबाला लोकसभा रहा है सैलजा का गढ़

लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो कुमारी सैलजा का अंबाला पुराना लोकसभा क्षेत्र रहा है। ऐसे में सैलजा गुट को आस है कि सिरसा लोकसभा और अंबाला लोकसभा में आने वाली विधानसभाओं में उनकी सुनी जाएगी। यह कार्यकर्ता वह हैं जो लंबे समय से विपक्ष में रहने के जमीन पर बावजूद कांग्रेस को संभाले हुए हैं। राहुल गांधी की पद यात्रा में भी दोनों गुटों में अपनी-अपनी ताकत दिखाने की होड़ सी दिखाई दी थी। वहीं दूसरी तरफ पूर्व मंत्री चौधरी निर्मल सिंह भले ही आप से वापस आए हों मगर उनकी भी कांग्रेस में पकड़ काफी मजबूत रही है। ऐसे में दोनों ही गुटों में आगे टिकट को लेकर क्या स्थिति रहती है यह देखने वाली बात रहेगी।
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