अंबाला सिटी। जिला अंबाला डेंगू के मामले लगातार देखने को मिल रहे हैं। इस बार शहरी व ग्रामीण क्षेत्र दोनों में बराबर मामले देखने को मिल रहा है। वीरवार को भी डेंगू के 11 नए मामलों की पुष्टि हुई है। इसके बाद कुल मामले बढ़कर 157 हो गई है। इस बार शहरी सीमा से लगने वाले क्षेत्रों में अधिक मामले देखने को मिल रहे है। हालांकि बीते वर्ष डेंगू के मामले शहरी क्षेत्र में अधिक मिले थे। इस बार पहले जैसी स्थिति देखने को नहीं मिली है।
वहीं दूसरी तरफ डेंगू वार्ड में 25 बिस्तरों की व्यवस्था है। इसके बावजूद मरीज अधिक हैं तो वार्ड भी भरे दिखाई दे रहे हैं। स्थिति ऐसी है कि बिस्तरों को लॉबी में लगाना पड़ता है। हालांकि कुछ मरीज ठीक होकर भी चले जाते हैं। इसके बाद भी दिक्कत रहती ही है।
जिला अंबाला में बीते वर्ष के मुकाबले सीमावर्ती क्षेत्र में अधिक मामले देखने को मिल रहे हैं। अंबाला के दुर्गा नगर, रत्नगढ़, गरनाला, रायवाली, घेल, खुड्डा कलां सहित कई क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें डेंगू के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं। इन क्षेत्रों में साफ- सफाई की व्यवस्था गंभीर है। इसलिए यहां पर अधिक मामले देखने को मिल रहे हैं। बीते वर्ष काला आम्ब हॉटस्पॉट क्षेत्र था। यहां से बहुत अधिक मामले देखने को मिले थे। लेकिन इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने मई माह ही कार्य शुरू कर दिया था। इसके लिए अगल से ब्रीड चैकर लगाए गए थे। जिससे समय रहते डेंगू के बचाव कार्य हो गए।
-
जांच किट का बजट बढ़ा
स्वास्थ्य विभाग रोजाना 80 मरीजों के डेंगू टेस्ट करवा रहा है। जांच अधिक होने के कारण बजट भी बढ़ गया है। अब तक विभाग ने एलाइजा जांच किटों के लिए दो लाख 50 हजार रुपए खर्च किए हैं। अब किट की कमी होने के कारण विभाग की ओर से 50 हजार रुपए की अतिरिक्त राशि मांगी गई है। एक किट करीब छह हजार रुपए की आती है। जिससे 100 टेस्ट किए जा सकते हैं। इस टेस्ट के बाद ही डेंगू की पुष्टि होती है।
इस वर्ष एसडीपी लगाने वाले मरीजों की संख्या कम है। अभी तक सिर्फ 6 मरीजों को ही एसडीपी लगाई गई है। जबकि बीते वर्ष 32 मरीजों को एसडीपी लगानी पड़ गई थी। एक एसडीपी के लिए स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों को 11 हजार रुपए का भुगतान करता है।
-
इस बार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बराबर ही मामले देखने को मिले हैं। बीते वर्ष के मुकाबले मामलों की संख्या कम है। इसके बावजूद विभाग द्वारा सतर्कता बरती जा रही है।
डॉ सुनील हरि, जिला महामारी नियंत्रक अधिकारी ।