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Ambala News: पहुंचने लगीं छह में से तीन खंड में किताबें

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शहर राजकीय प्राथमिक स्कूल पुलिस लाइन में बच्चों को पढ़ाती ​शि​क्षिका। संवाद
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अंबाला सिटी। राजकीय स्कूलों में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क किताबें नहीं पहुंची हैं। इस वजह से विद्यार्थी पुरानी किताबों से ही पढ़ने पर मजबूर हैं।
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पहली से पांचवीं तक तो कक्षा रेडिनेस कार्यक्रम चलाया जा रहा है, मगर छठी से आठवीं कक्षा तक किताबें न होने से विद्यार्थियों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। छठी कक्षा का तो पाठ्यक्रम ही बदलने से पुराने किताबों से भी नहीं पढ़ाया जा रहा। इस वजह से शिक्षकों के लिए भी परेशानी बढ़ रही है। अमर उजाला ने इसको लेकर ग्राउंड पर जाकर निरीक्षण किया।
पुलिस लाइन के राजकीय प्राथमिक स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक विद्यार्थियों के लिए किताबें नहीं पहुंची हैं। पिछले दो वर्षों में परीक्षा परिणाम आने के दिन ही विद्यार्थियों को किताबें दे दी जाती थी। स्कूल प्रभारी नवनीत कौर ने बताया कि विद्यार्थियों को कक्षा रेडिनेस कार्यक्रम के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। उनकी पिछली कक्षा की कमियों को सुधारा जा रहा है। स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक 146 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
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इसी तरह कपड़ा मार्केट स्थित राजकीय स्कूल नंबर-सात में भी विद्यार्थियों के पास किताबें नहीं पहुंची हैं। यहां कक्षा छठी में विद्यार्थियों को बिना किताबों के पढ़ाया जा रहा था, क्योंकि इस बार कक्षा छठी का पाठ्यक्रम बदला गया है। इस वजह से पुरानी किताबों से भी पढ़ाया नहीं जा सकता। स्कूल में विषय विशेषज्ञ अपने विषयों से संबंधित पढ़ाई करवा रहे हैं ताकि विद्यार्थियों का समय खराब न हो।
नई छात्र संख्या के हिसाब से किताबें पहुंचाई जाएं : छाबड़ा
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य प्रवक्ता अमित छाबड़ा ने बताया कि नारायणगढ़ खंड में किताबें सभी स्कूलों में पहुंच चुकी हैं, जबकि शहजादपुर और बराड़ा खंड के कुछ स्कूलों में अभी किताबें नहीं आई हैं। विभाग की ओर से पुरानी छात्र संख्या के हिसाब से किताबें भेजी जा रही हैं। उनकी मांग है कि विभाग पहले खंड स्तर और बाद में जिला स्तर पर नई छात्र संख्या के हिसाब से किताबों का समायोजन करें।
वर्जन
राजकीय स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक किताबें पहुंचनी शुरू हो गई हैं। नारायणगढ़, शहजादपुर और बराड़ा खंड में किताबें आ चुकी हैं। बाकी के खंड में भी जल्द ही किताबें पहुंचेंगी।
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सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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