अंबाला। पूरी निष्ठा और ईमानदारी से चुनाव ड्यूटी दी। पोलिंग पार्टियों को अपने खर्च पर चाय नाश्ता कराया। बावजूद इसके सरकारी मानदेय नहीं मिला। यह पीड़ा अंबाला कैंट के उपमंडल कार्यालय पहुंचे लगभग 200 बीएलओ ने जाहिर की। वहीं, मामले में उन्होंने पहले कानूनगो से मंंत्रणा की और फिर उन्होंने चुनाव तहसीलदार को इसकी जानकारी दी तो लगभग दो घंटे बाद समस्या का आधा-अधूरा समाधान हो पाया।
मानदेय की कुल रकम 800 रुपये थी, लेकिन इसमें से 300 रुपये खाने के काटकर 500 रुपये बीएलओ को पकड़ा दिए जोकि उन्होंने लेने से इंकार कर दिया। इस मौके पर मौजूद बीएलओ अनिल धीमान, नवीन, सुरिंदर, शशि, निर्मल, सुरिंदर, मोनिका, नीलम, बॉबी और साक्षी ने बताया कि लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने विभागीय निर्देशों के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाई।
बीएलओ ने घर-घर जाकर मतदाताओं को मतदान से संबंधित पर्चियां बांटी। वहीं जब 24 मई को पोलिंग पार्टियां अपने-अपने बूथ पर पहुंची तो वहां के बीएलओ ने अपनी जेब खर्च से उन्हें चाय-नाश्ता करवाया। 25 मई को भी मतदान के दिन वो पूरा दिन मतदान कराने में जुटे रहे और पोलिंग पार्टियों की भी मदद करते रहे, बावजूद इसके उन्हें मानदेय नहीं दिया।
जबकि उसी दिन पोलिंग पार्टियों को उनका मानदेय वितरित कर दिया गया। बीएलओ ने यह भी बताया कि 2019 के चुनावों में भी उनके साथ ऐसा हुआ था और उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय नहीं मिला था। अगर इस बार भी पूरा मानदेय न मिला तो वो आगामी विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने पर मजबूर हो जाएंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। प्राप्त जानकारी अनुसार ऐसी ही परेशानी मतदान ड्यूटी में लगे अन्य कर्मचारियों को भी झेलनी पड़ी, उन्हें भी खाने के 300 रुपये नहीं दिए गए।
अधिकारी बोले दस्तावेज पर किए हस्ताक्षर
मतदान ड्यूटी पर लगे प्रत्येक कर्मी को खाने का सामान उपलब्ध करवाया गया था और उन्होंने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए हैं। फिर भी वो अपने स्तर पर इसकी जांच करवाएंगे और जो उचित होगा, वो कार्यवाही करेंगे। अभी 500 रुपये ही कानूनगो को देने के निर्देश दिए गए हैं।
संदीप, तहसीलदार चुनाव, अंबाला।