अंबाला सिटी। बड़ौला गांव में पराली से बायोगैस बनाने के लिए प्लांट जल्द ही शुरू होगा। इस प्लांट के निर्माण को लेकर कार्य चल रहा है। यहां पराली से बायो सीएनजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) बनाई जाएगी। गैस बनाने के बाद पराली का जो वेस्ट मेटेरियल बचेगा, उसका बॉयोमॉस पैलेट बनाया जाएगा।
यह इंडस्ट्री में बॉयलर में जलाने में काम आएगा। इस वेस्ट सामग्री को आगे टेंडर पर सप्लाई करेंगे। जहां यह बिजली बनाने के काम आएगा। पराली से बनने वाली बायोगैस गाड़ी और घरों में इस्तेमाल की जाएगी। इसके लिए अलग-अलग कंपनी से टाइअप किया जाएगा। प्लांट में आगामी दो महीने में बायोगैस बननी शुरू होगी। प्लांट में 15 टन गैस प्रतिदिन और बॉयोमॉस पैलेट 80 टन प्रतिदिन बनाया जाएगा।
27 हजार मीट्रिक टन पराली का लक्ष्य
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हरदीप सिंह ने बताया कि यह बायोगैस प्लांट तैयार किया जा रहा है। जल्द ही दो महीने में बायोगैस बननी शुरू होगी। यह प्रोजेक्ट करीब 60 से 70 करोड़ से तैयार होगा। इस प्रोजेक्ट को कैम एनर्जी बायोफ्यूल्स कंपनी चलाएगी। इस वर्ष पराली का स्टॉक जमा करने का 27 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य है। अभी तक करीब 18 से 20 हजार मीट्रिक टन पराली जमा हो गई है। पराली स्टॉक के लिए तीन जगह बनाई है। इनमें बड़ौला के साथ कोंकपुर और जैनपुरा में पराली का स्टॉक की जा रही है। कोंकपुर में 14 एकड़ और जैनपुरा में 10 एकड़ जगह पर पराली स्टॉक की गई है।
इस बार पराली का ज्यादा हो रहा प्रबंधन
धान के सीजन में इस बार पराली प्रबंधन ज्यादा हो रहा है। कई लोग किसानों से टाइअप कर पराली प्रबंधन कर रहे हैं। पंजाब की भी बेलर मशीन यहां चल रही हैं। पराली प्रबंधन के लिए किसानों को सरकार की ओर से एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि मिल रही है। इस कंपनी ने भी अलग-अलग कांट्रेक्टर से संपर्क किया है। वह इन्हें पराली उपलब्ध करवा रहे हैं।
कई पेपर मिल में भी जा रही पराली
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग उप निदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी ने बताया कि पराली प्रबंधन के बाद पिहोवा, केसरी, काला अंब में पेपर मिल में जा रही है। डेराबस्सी भी पराली जा रही है। बड़ौला गांव में प्लांट में काफी पराली इस बार स्टॉक की जा रही है। इस प्लांट में पराली से बायोगैस बनाई जाएगी। पिछले वर्षों के मुकाबले किसानों में पराली प्रबंधन के लिए जागरूकता आई है।