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भागवत पुराण भगवान की प्राप्ति करने का सरल माध्यम

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अंबाला सिटी। श्रीमद्भागवत महापुराण वेदों का सार है, इसमें भगवान की प्राप्ति करने और भगवान की भक्ति के अनेक मार्ग छिपे हुए हैं। भक्त चाहे तो वह भगवान की प्राप्ति करने के लिए भागवत स्वरूपी रसपान कर सकता है, जिससे भगवान की प्राप्ति करना बहुत सरल हो जाता है। उपरोक्त शब्द सिटी के लक्ष्मी नगर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर धर्मशाला में श्री राधे श्याम ठाकुर सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह अमर कथा के दूसरे दिन व्यास आचार्य चैतन्य महाराज ने कहे।
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कथा से पूर्व पंडित रविंद्र नाथ तिवारी ने मंत्रोच्चारण कर विधिवत पूजा अर्चना की गई। इसमें तरशेम सिंह राणा, बालादेवी राणा, कथा यजमान रामकिशन शास्त्री, सरोज बाला आदि ने तिलक लगाकर व पुष्प मालाएं पहनाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा का प्रसंग आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य महाराज ने कहा कि भागवत क्या हैं? भागवत में चार अक्षर हैं, भा-ग-व-त यह चारों अक्षर कुछ संकेत करते हैं। जिसको समझना बहुत जरूरी है।
जैसे कि भा-से भक्ति, ग-से ज्ञान, व-से वैराग्य और त-से तत्व, अर्थात जिस शास्त्र ग्रंथ में भक्ति युक्त ज्ञान वैराग्य सहित ब्रह्म तत्व की चर्चा की गई है उसे भागवत कहा गया है। इस मौके पर पूर्वांचल पूजा समिति अंबाला शहर के राजेश राव, गजेंद्र सिंह, सोनू शुक्ला, रामप्रसाद तिवारी, सुनील झा, मुन्ना पाठक, रविंद्र नाथ मौर्य, सरोज राय, शैलेश सिंह, कुलदीप, श्यामल, सूरजभान, तनेजा मिश्रा, अभिषेक सिंह, धनश्याम रतन आदि मौजूद रहे।
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