राष्ट्रीयकृत बैंकों की हड़ताल के दूसरे दिन एटीएम भी लोगों का साथ छोड़ गए। एटीएम में कैश खत्म हो गया और लोगों की निर्भरता निजी बैंकों के एटीएम पर रही।
दिन भर इन एटीएम के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही, जबकि करोड़ों रुपयों का कारोबार मंगलवार को प्रभावित हुआ। सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रही, जिनको कैश के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के आह्वान पर राष्ट्रीयकृत बैंक दो दिन की हड़ताल पर रहे। मंगलवार को हड़ताल का दूसरा दिन था। बैंक कर्मचारियों की मांग है कि एक नवंबर 2012 से जो वेतन वृद्धि की जानी थी, वह नहीं की जा रही है।
इसके अलावा बैंक रिफार्म के नाम पर भी धोखाधड़ी की जा रही है। रिफार्म के नाम पर राष्ट्रीयकृत बैंकों को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है, जबकि बैंकिंग क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी मांग को लेकर मंगलवार को भी जिले में बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और कामकाज ठप रखा।
उधर, हड़ताल के दूसरे दिन सरकारी बैंकों के एटीएम तक लोगों का साथ छोड़ गए। लोगों ने हड़ताल के पहले ही दिन इन एटीएम से कैश निकलवा लिया, ताकि दूसरे दिन कोई परेशानी न हो।
लेकिन अधिकतर लोग जब मंगलवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों के एटीएम से रुपये निकलवाने के लिए गए, तो इन एटीएम का कैश खत्म हो चुका था। एक के बाद दूसरे एटीएम पर लोग भटकते रहे, लेकिन कैश नहीं निकला। राहत की बात यह रही कि निजी बैंकों के एटीएम से कैश निकलवाए, लेकिन इसके लिए काफी देर तक इंतजार भी करना पड़ा।
इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को कैश निकलवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। ग्रामीण क्षेत्रों में निजी बैंकों की हड़ताल के चलते न तो कार्यालय खुले और न ही उनके एटीएम से कैश निकला जा सका।
ऐसे में इन ग्रामीणों को कैश के लिए शहरी क्षेत्रों में आकर निजी बैंकों के एटीएम से कैश निकवालना पड़ा। कई तो काफी दूर से सिर्फ कैश निकलवाने के लिए ही आए, जबकिकई एक एटीएम से दूसरे एटीएम तक भटकते रहे।